रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३७७
अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
१७—प्रतिदिन सबेरे और शाम को पाखाना जाना चाहिए।
दो बार पैखाना जाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।
१८—नित्य प्रति सबेरे चार बजे उठना, और रात को नौ बजे
सोना चाहिए। इससे स्वास्थ्य वृद्धि होती है।
१९—सबेरे बासी मुँह पानी पीकर कुछ देर टहलना चाहिए
और फिर शौच दन्तधावन, स्नान से निवृत्त होकर बाहर वायु-सेवन
के लिए निकल जाना सर्वोत्तम है। चलने में इतनी तीव्रता हो कि
अंग-प्रत्यंग में पसीना आ जाय। किसी शुद्ध स्थान पर खुली हवा
में बैठकर सन्ध्या और प्राणायाम करना चाहिए, तत्पश्चात् घर
में आकर सूर्योदय के साथ-साथ हवन कर डाले।
२०—ताजा और सादा भोजन अच्छा है। बासी और गरिष्ठ
भोजन स्वास्थ्य बिगाड़ता है।
२१—बत्तीस अथवा चालीस ग्रास से अधिक भोजन नहीं
करना चाहिए। चाहे कितना ही स्वादिष्ट भोजन क्यों न हो।
२२—किसी भी ऋतु में मुँह ढँक कर न सोना चाहिए। श्वास
सदा नाक से ही लेनी चाहिए, मुँह से नहीं।
२३—स्नान के समय सबसे पहले सिर धोकर फिर सर्वाङ्ग
स्नान करें। इससे आरोग्यता और बुद्धि बढ़ती है।
२४—पानी हमेशा ढाँप कर रखना और छानकर पीना चाहिए
२५—अनपच या पेट का दर्द दूर करने के लिये ताजा अथवा