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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 391, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ३७६
भोजन का परिमाण
एक स्वस्थ साधारण मनुष्य के लिए ३२ ग्रास और कसरती
के लिए ४० ग्रास तक भोजन करना चाहिए । क्योंकि परमात्मा ने
बत्तीस दाँत दिये हैं इस लिये बत्तीस ही ग्रास उचित हैं यदि
अधिक बलवान कसरती है तो सवायी मात्रा ४० ग्रास रक्खी गयी
है । रोगी के लिये आधी अथवा यथोचित खुराक होनी चाहिए ।
एक ग्रास एक तोलाभर की होना उचित है इससे अधिक नहीं ।
चालीस तोले का आध सेर और बत्तीस का डेढ़ पाव तैयार अन्न
होता है । इतना एक व्यक्ति के लिए पर्याप्त है । एक मसल है
“आधपाव रोगी, पावभर भोगी, आधसेर मर्द, और सेर भर बघ”
आधसेर से ऊपर सिवाय पेटू के और कौन खा सकता है । किन्तु
जिनको दुग्धादि पदार्थ प्राप्त नहीं हो सकते उनकी खुराक अधिक
बढ़ जाती है, क्योंकि तर पदार्थ स्वभावतः अन्न का भाग कम कर
देते हैं । इसी लिये आजकल लोगों की खुराक अधिक बढ़ी हुई है
क्योंकि उन्हें घी दुग्ध आदि तर पदार्थ प्राप्त नहीं हो रहे अतः शुष्क
खुराक बढ़ रही है । इसका परिणाम सिवाय रोग के और क्या हो
सकता हैं । इसी लिये उदर विकारों के रोग का प्रकोप हर ओर
दिखायी दे रहा है । यह भी मिथ्याहार कहाता है । दुग्ध घी की
रक्षा के लिये गो-रक्षा की परम आवश्यकता है । इसमें वनस्पति आदि
का घी दुग्ध काम न कर सकेगा । प्रत्युत उससे हानि ही होगी ।