रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४ असली कोकशास्त्र ३६६
में नीचे छेद करके भर दे। छेद में कपड़े की बत्ती [...] कर लगा
दे। बाद जमीन में एक गढ़ा खोदकर एक बर्त्तन रख और उसके
ऊपर लकड़ी से भरी हुई छेदवाली हँडी रख दे। फिर उस बर्त्तन
या मुँह अच्छी तरह से बन्द करके उसके ऊपर गोहरी सुलगा दे।
इस प्रकार आँच पाकर जब लकड़ी का तेल नीचे के बर्त्तन में टपक
जाय, तब उसे बोतल में भर कर धर दे ओर वही तेल खुजली में
लगावे। यह तेल स्त्री-पुरुष सबकी खुजली को नष्ट कर देता है;
किन्तु अत्यन्त छोटे बच्चों को यह तेल न लगाना चाहिए; क्योंकि
यह कुछ-कुछ चुन चुनाता है।
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मसान
यह रोग अधिकतर सौर में उत्पन्न होता है। इस रोग की
उत्पत्ति गन्दगी के कारण होती है। इसमें बालक की पसली चलने
लगती है, ज्वर भी हो आता है। पसलियों में कफ जम जाता है।
कभी तो दस्त होते हैं और कभी नहीं होते। बालक अचेत रहता
है। यह सर्द और गर्म दो प्रकार का होता है। इस रोग में दस्त
करा देना बड़ा ही लाभदायक है। गर्म से होने वाले मसान में तो
कोई डर नहीं रहता, परन्तु सर्दी से होने वाले मसान में भय रहता
है। इसकी दवा यह है:—
कबीला, चूना, नीलाथोथा, बड़ी हड़, बहेड़े का छिलका, और