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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 380, कुल 440 में से

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पृष्ठ 380

३७० असली कोकशास्त्र
सफेद कत्था इन सबको सम-मात्रा में ले कूट-छान कर गोली बना
ले। फिर इसको घी में मिलाकर बालक की पसली पर लेप कर दे।
अथवा, कंजे का बीज एक, नीलाथोथा एक रत्ती इन दोनों चीजों
को पीसकर सरसो के बराबर की गोली बनाकर रख दे और एक
गोली प्रति दिन बच्चे को खिलाया करे। या रेंडी का तेल बालक
के पेट पर मलकर बकाइन के पत्ते गरम करके बाँध दे।
यदि बालक के शरीर पर लाल चकत्ते पड़ गये हों और ज्वर
भी हो तथा वे ऐसे हों कि आज पेट पर दिखलायी पड़ें तो कल
जाँघों पर दिखलायी पड़ें और परसों मुख पर निकल आवें, तो
बैंतरा सोंठ का चूर्ण पावभर, दही आधपाव, छोटी पीपल आधपाव
इन सबको मिट्टी की हाँड़ी में भर कर उसका मुँह बन्द कर दे।
बाद एक गढ़ा खोदे और उसमें हाँड़ी रखकर चारो ओर से गोहरी
धर के आग लगा दे। जब गोहरी जलकर राख हो जाय तब उस
राख को निकाल कर दूसरी गोहरी भर कर फिर आग लगा दे।
इस प्रकार तीन आँच देकर ठण्ढा हो जाने पर हाँड़ी में से रत्ती-
रत्ती भर सब दवा निकाल कर शीशी में रख मजबूती से काग
लगा दे। फिर यही दवा माता के दूध में चावल भर दे। यदि रोग
का बल अधिक हो तो एक रत्ती अदरक का रस और छः रत्ती
शहद मिलाकर तीन दिन तक दोनों वक्त दे।
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