रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
पृष्ठ 378, कुल 440 में से
संदर्भ में पढ़ें३६८ असली कोकशास्त्र
देना आवश्यक है। यद्यपि इससे कोई विशेष लाभ तो नहीं होता,
क्योंकि हाथ में थैली लगी रहने पर बालक दरेर कर खुजलाता है
और घाव कर ही देता है; तथापि इतना फायदा तो अवश्य ही
होता है कि बालक आसानी से अंग को खुजला नहीं सकता और
जहाँ खुजलाता है वहाँ विषैला नाखून नहीं लगा सकता।
खुजली निवारण करने के लिए कबूतर के पंख से मक्खन या
मलाई खुजली के स्थान पर लगा देना चाहिए। अथवा चूने के पानी
में नारियल का तेल फेट कर लगा देना चाहिए। इसके लगाने से
दाग नहीं पड़ता और रोगी बालक को आराम मिलता है।
जब शीतला के दाने फूट जायें, तब सिर्सा, पीपल, लिसोरा
और गूलर को छाल को जलाकर उसकी पिसी हुई राख में घी
मिलाकर फफोलों पर लगाना चाहिए। इससे दाने बहुत जल्द
अच्छे हो जाते हैं।
—*—
खुजली
यदि बालक को खुजली हो जाय तो चूने के साफ पानी में
कड़वा तेल डालकर खूब हिलावे। जब वह गाढ़ा हो जाय, तब रुई
के फाहे से खुजली पर लगा दे।
तेली को कोल्हू का पुराना पाचर जो खूब तेल खाये हुए हो,
लाकर उस लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े करके एक मिट्टी के बर्त्तन