सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 305, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 305

असली कोकशास्त्र २६१
भूगोल के सम्बन्ध में भी वही बात है; गोलमटोल पृथ्वी का
नक्शा जान लेना, बड़े-बड़े राज्य और उसकी राजधानी, पर्वत
समुद्र और नदियों का जान लेना ही स्त्रियों के लिए पर्याप्त है।
यदि वे इससे अधिक जानें तो और भी अच्छा, नहीं तो इतना तो
जरूर ही जानना चाहिए। इसी प्रकार अन्यान्य विषयों का भी
स्त्री को ज्ञान होना चाहिए।
―――*―――
प्रेम
स्त्री ओर पुरुष के सम्बन्ध की जड़ प्रेम है। प्रेम बड़ा ही
विचित्र पदार्थ है। क्योंकि इसमें स्वर्ग और नर्क दोनों ही छिपे हैं।
सच्चा प्रेम वही है, जिसमें किसी प्रकार का स्वार्थ न हो। सच्चा प्रेमी
अपने प्रेमिकों से प्रेम का बदला नहीं चाहता। वह तो यह जानता
ही नहीं कि उसे अपनी प्रेमिका से क्यों इतना प्रेम है। क्योंकि उसे
देखते ही उसके आनन्द की सीमा नहीं रहती। शिव-पार्वती में ऐसा
ही प्रेम था। एकबार पार्वती के पिता दक्ष प्रजापति ने उनके सामने
शिवजी की निन्दा की थी, इस लिए पार्वती ने अपना प्राण दे
दिया। जानकी जी ने सच्चे प्रेम के कारण ही अपने पति भगवान
रामचन्द्र के साथ बनों में फिरीं। महारानी दमयन्ती ने राजा नल
के लिए साधारण कष्ट नहीं सहा। पति-पत्नो का पवित्र प्रेम ही
प्रेममय परमेश्वर के प्रेम का विकाश है। इसीसे जगत को प्रेम