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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 306, कुल 440 में से

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पृष्ठ 306

२६२ असली कोकशास्त्र
करने की शिक्षा मिलती है। पति-पत्नी का सच्चा प्रेम सामाजिक या
शारीरिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक है। शरीर-सुख अथवा तुच्छ
भोग-विलास के लिए जो प्रेम होता है, वह प्रेम कोई चीज नहीं है
और न तो अधिक काल तक ठहरता ही है। पवित्र प्रेम नित्य
नये रस से पति-पत्नी के हृदय को सींचा करता है।
सच्चा प्रेम स्त्री-पुरुष के मन और हृदय को एक बना देता है।
प्रत्येक मनुष्य स्वतन्त्र है, अतः ऐसे स्वतन्त्र दो हृदयों को एक
बना देना आसान काम नहीं है। जब तक दोनों प्रेमियों के लक्ष्य,
भाव, धर्म, अवस्था एक न हों, तब तक वास्तविक मिलन होना
सम्भव नहीं। किन्तु दुःख की बात है कि आजकल आदर्श विवाह-
सम्बन्ध में लोग उक्त बातों पर तनिक भी ध्यान नहीं देते। इस
लापरवाही का फल यह हो रहा है कि कितने ही स्त्री-पुरुषों में ठीक
उतना ही भेद दिखलायी पड़ता है, जितना कि पशुओं में। न तो
स्त्री अपने पति पर अनुराग रखती है और न पुरुष अपनी स्त्री पर।
यही कारण है कि आजकल जो सन्तानोत्पत्ति हो रही है, वह मूर्ख,
प्रेम-हीन, माता-पिता पर अश्रद्धा रखनेवाली और अनेक प्रकार के
दुर्गुणों से भरी हुई। क्योंकि माता-पिता के ही रक्त, मांस, बल,
वीर्य और स्वभाव को लेकर ही तो बच्चे पैदा होते हैं; जिस बात
का माँ-बाप में ही अभाव है, वह बात उनमें कहाँ से आ जायगी?
यहाँ पर कुछ लोग यह कह सकते हैं कि जब यही बात है तब फिर
मूर्ख और क्रूर माँ-बाप से विद्वान् और दयालु बच्चा कैसे पैदा होता