रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७२ असली कोकशास्त्र
समुद्रसोख, कायफल, सालवमिश्री, हंसराज, शकाकुल और सफेद
मुसली ये सब चार-चार तोला बंसलोचन एक तोला, छोटी इलाइची
एक तोला, बादाम पावभर, गरी आधपाव, छुहाड़ा और दाख
आध-आध पाव, घी डेढ़ सेर, आटा डेढ़ सेर और देशी शकर दो
सेर। गोंद को घी में तल कर फुला लेना चाहिए। इन सबको
पंजीरी बनाकर उसमें सफेद मुसली और स्याह मुसली एक सेर,
दखिनी सुपारी, सिरयाली के बीज, गाजर के बीज, बीचबन्द,
मँजीठ, कौंच के बीज, धाय के फूल, पलास की गोंद, इन्द्र जौ,
तेजबल, पीपलामुल, माईं, समुद्रसोख, वायविडंग, देशी आजवायन
तालमखाना, सोंठ, गोखरू, माँजूफल, दालचीनी, मोचरस, कमर-
कस, बबूल की कली, बड़ी इलाइची, असगन्ध सब एक-एक तोला
और संगजराहत तीन तोला इन सबको कूट कपड़छान करके उसमें
डाल दे। बाद यही पंजीरी बलाबल के अनुसार खिलावे। इससे
शीघ्र रक्त-स्राव बन्द हो जाता है।
जब तक स्त्री बच्चा होने बाद पुनः पूर्ववत् रजस्वला होकर शुद्ध
नहीं हो जाती, तब तक उसे प्रसूता ही कहा जाता है। प्रसव के
बाद प्रायः महीने डेढ़ महीने में स्त्रियाँ ऋतुमती होती हैं। बहुत से
लोग सौर में बारह दिन तक रहने को ही प्रसूता मानते हैं; किन्तु
यह उनकी भूल है। आयुर्वेद में लिखा है:—
प्रसूतासार्धमासान्तेदृष्टेवापुनरार्त्तवे ।
अर्थात्—प्रसव के दिन से पैंतालिस दिन पर्यन्त अथवा पुनः