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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 283, कुल 440 में से

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पृष्ठ 283

असली कोकशास्त्र २७१
को पानी में औटाकर पीना चाहिए । ये चीजें भी वैसी ही गुण-
कारी हैं । अथवा यदि दशमूल का काढ़ा पान करे तो और भी
अच्छा हो । यह पूर्व प्रसूत तक के उत्पन्न हुए रोगों को नष्ट कर
देता है । दशमूल के काढ़े में ये चीजें हैं:—१-शालपर्णी, २-पृष्ठिपर्णी
३--दोनों कटेरी, ४-गोखरू, ५-बेल की गिरी, ६-अरणी, ७-अरलू
८-पाढ़, ९-खम्भारो ( कुमेर ), १०-पीपल । दशमूल में इन दसों
चीजों की समान मात्रा है। यदि पहले से ही इनका अर्क उतारा
हुआ हो तो और भी अच्छा है ।
बहुत जगह की यह प्रथा है कि प्रसूता को पानी नहीं दिया
जाता । पर वास्तव में ऐसा करना ठीक नहीं । प्यास लगना ही
पानी की इच्छा सूचित करता है। इस लिए इस स्वाभाविक माँग
को पूर्ण न करना हानि के सिवा लाभ नहीं पहुँचा सकता । यदि
प्रसूता को प्यास लगे तो दूध देना चाहिए; किन्तु यदि उससे
उसकी तृप्ति न हो तो थोड़ा सा पानी दे देने में कोई हानि नहीं ।
हाँ, बालक पैदा होने के २४-३० घण्टे के भीतर अवश्य ही पानी
नहीं देना चाहिए ।
दाइयों की असावधानी के कारण प्रसूता के प्रसवद्वार से
स्वाभाविकता से अधिक खून गिरने लगता है। ऐसी दशा में नीचे
लिखी दवा बनाकर खिलानी चाहिए:—
दोनों सुपारी, भाँवरी गोंद, कटीरा, गोंद बबूल, पठानी लोध,
कमरकस और गुलधावा इन चीजों को आठ-आठ तोला, माँजूफल,