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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 285, कुल 440 में से

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पृष्ठ 285

१८ असली कोकशास्त्र २१३
रजस्वला होने तक स्त्री की 'प्रसूत' संज्ञा है ।
इस लिए डेढ़ महीने तक अर्थात् जब तक किसी शास्त्रकारों के
कथनानुसार प्रसूता रहे, उसकी देख-रेख बड़ी ही सावधानी से
करनी चाहिए । सूतिका-गृह को शुद्ध और सुगन्धित रखना चाहिए
तथा प्रसूता के खान-पान की ओर पूरा ध्यान रखना चाहिए ।
पाठिकायें पूछ सकती हैं कि सौर घर को सुगन्धित किस प्रकार
रक्खा जाय ? क्या इत्र इत्यादि से ? नहीं, इच्छा हो तो इत्र से
भी सुगन्धित रक्खे नहीं तो केवल सुगन्धित चीजों की धूनी ही कर
दिया करे । इन चीजों की धूनी कर देने से घर सुगन्धित हो सकता
है:—कपूर कचरी पावभर, चन्दन का चूर्ण पावभर, नागरमोथा
आधापाव, अगर-तगर, लाल चन्दन, गिलोय ढाई-ढाई तोला,
गुग्गुल पाँच तोला, मँजीठ छः माशा, देवदारू एक तोला, मखाना
दो तोला, दालचीनी एक तोला, लौंग एक तोला, ओर बड़ी
इलायची एक तोला इन चीजों को कूट कर गाय का घी, देशी खाँड़
और शहद मिलाकर रख दे । और उसमें से थोड़ा आग में डालकर
धुआँ करके सूतिका-गृह को सुगन्धित कर दिया करे ।
हमारे यहाँ सूतिका-गृह में बहुधा हर समय भीड़ सी लगी
रहती है; स्त्रियाँ बारी-बारी से प्रसूता के पास बैठकर व्यर्थ की बातें
किया करती हैं । इन कामों से बड़ो ही हानि होती है । एक तो
अधिक आदमियों के रहने से सूतिका-गृह की वायु दूषित हो जाती
है, जिससे नाजुक बच्चे की तन्दुरुस्ती बिगड़ जाती है, दूसरे व्यर्थ