रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
पृष्ठ 246, कुल 440 में से
संदर्भ में पढ़ें२३६ असली कोकशास्त्र
इस प्रकार रुकावट हो जाने पर गो-दुग्ध में गूलर के पके फल
का सेवन शुरू कर दे गर्भवती को ठण्डे स्थान में सुला दे और ठंडा
पानी पिलावे । ठण्डे पानी से प्रसव-द्वार को धो डाले । यदि रुधिर
का निकलना शुरू हो गया हो तो दूध के साथ कसेरू या सिंघाड़ा
अथवा कमल औटाकर ठण्डा हो जाने पर पिलावे । अथवा दो तीन
चावल भर अफीम का सत किसी सूखी वस्तु के साथ खिला देना
चाहिए ।
यदि पहले ही पहल गर्भाधान हुआ रहता है तो गर्भस्त्राव या
गर्भपात छः सात घण्टों में ही हो जाता है, देर नहीं लगती।
किन्तु यदि स्त्री दूसरी या तीसरी बार गर्भ धारण किये रहती है
तो दो तीन दिन लग जाते हैं । जिस स्त्री का गर्भ नष्ट हो जाय,
उसे कम से कम पाँच छः महीने तक पति के पास नहीं जाना
चाहिए । क्योंकि इसके भीतर गर्भ रह जाने से उसके भी नष्ट हो
जाने की आशंका रहती है। जिस स्त्री का गर्भ बराबर नष्ट होता
ही जाय, उसे गर्भ की रक्षा के लिए गर्भिणी होने पर खूब साव-
धानी से रहकर इस प्रकार दवा का सेवन करना चाहिए ।
पहले महीने में मुलहठी, दुद्धी और देवदारु की पोटली बाँधकर
दूध में डाल दे । जब दूध पीने के लायक पक जाय, तब उसे आग
के ऊपर से उतार ले और पोटली को निकाल कर फेंक दे । बाद
उस दूध में मीठा डालकर पिया करे ।
दूसरे महीने में करंजवा, काला तिल, मँजीठ और शतावर की