रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २३७
पोटली डालकर ऊपर की रीति से दूध में पकाकर पिये ।
तीसरे महीने में दुद्धी, कमलगट्टा, सरिवन और साँठी के
चावल की खीर खाया करे ।
चौथे महीने में कटेरी, कम्भारी, दूधवाले वृक्ष की कोंपल दूध
में औटाकर पिये तथा घी या दही से भात खावे ।
पाँचवें महीने में दूध भात खाना बड़ा ही उपयोगी है ।
छठे महीने में पृष्ठपर्णी, सहिजन, गोखरू और गिलोय को
दूध में औटाकर उसे पिये । घी मिलाकर भात खाय दूध की लस्सी
का सेवन करे । गोखरू को घी में पकाकर खाय ।
सातवें महीने में सिंघाड़ा, मुनक्का, केसर, मुलहठी और चीनी
को दूध में औटाकर पिये ।
आठवें महीने में कैथ, कटेरी, बेल, परवल और ईख, इन
सबकी जड़ को दूध में पकाकर पीना चाहिए । या दूध में रेंडी का
तेल और मीठा मिलाकर कभी कभी पी लेना उचित है ।
नवें महीने में मुलहठी और देवदारु दूध में पकाकर सेवन
करना हितकर है ।
दसवें महीने में सोंठ और दुद्धी को दूध में पकाकर पीना चाहिए।
मुलहठी, साल वृक्ष के बीज, देवदारु, नोनिया साग, काले
तिल, राल, शतावर, पीपल, कमल की जड़, जवासा, गौरीसर
बायसुरई, दोनों कटेरी, सिंघाड़ा, कसेरू, दाख और मिश्री तीन
तीन माशे ले और सात महीने तक प्रति मास में सात सात दिन