रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २३५
चार महीने के भीतर जो गर्भ नष्ट हो जाता है, उसे तो गर्भ-
स्राव कहते हैं और उसके बाद नष्ट होने वाले को गर्भपात । इसके
लक्षण ये हैं—
१—यदि गर्भ नष्ट होने को होता है तो अचानक शक्ति क्षीण
हो जाती है, चित्त में व्याकुलता छा जाती है और बेहद ओक
आती है ।
२—जी डूबा-सा जाता है । यह होता है कि कहाँ जाऊँ, क्या
करूँ । पता नहीं चलता कि ऐसा क्यों हो रहा है ।
३—खड़ी होने से सिर घूमने लगता है, चक्कर आ जाता है ।
४—पेट के ऊपर और दोनों जंघों में रह रह कर वेदना होती
है । मूत्रस्थान से तरबूज का सा पानी झरने लगता है ।
५—यदि कमर, जंघा और गुदा में अधिक पीड़ा हो, शूल हो
और रुधिर या रुधिर की डली बाहर आने लगे तो समझना
चाहिए कि गर्भ, गर्भाशय से अलग हो गया है ।
यदि गर्भस्राव के लक्षण दिखलायी पड़ने लगें और पूरा
निश्चय हो जाय कि गर्भस्राव होनेवाला है, तब उसके आरम्भ में
ही यानी पीड़ा ही हो, रुधिर निकलना शुरू न हुआ हो—यह
उपचार करना हितकर है—
१—मुसहठी, देवदारू और दुद्धी इन चीजों के साथ दूध का
सेवन करे ।
२—शतावर और दुद्धी का काढ़ा पीवे ।