रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २१५
प्रमेह के लक्षण
यह रोग जब होने वाला होता है, तब पहले दाँतों में मैल
अधिक जमने लगती है। कण्ठ जीभ और तालू में भारीपन मालूम
होने लगता है, हाथ पैर में जलन शुरू हो जाती है, मुँह में मिठास
होती है, प्यास अधिक लगती है, बाल आपस में चिपक जाते हैं,
तथा समूचे शरीर में चिकनाहट आ जाती है। आयुर्वेद के ग्रन्थों
में यह रोग २० तरह का बतलाया गया है। कफज १० पित्तज ६
और वातज ४ प्रकार का होता है।
कफज प्रमेह
इक्षु प्रमेह—पेशाब गन्ने के रस की तरह मीठा होता है। यह
याद रहे कि हर प्रमेह में पेशाब के आगे पीछे या पेशाब में मिल-
कर वीर्य गिरता है। किसी किसी प्रमेह में तो उसका गिरना प्रतीत
होता है और किसी किसी में बिलकुल दिखलायी नहीं पड़ता।
सान्द्र प्रमेह—यदि रात को पेशाब किसी बर्तन में रख दिया
जाय और सबेरे वह बिलकुल गाढ़ा हो जाय तो समझना चाहिए
कि सान्द्र प्रमेह है।
उदक प्रमेह—पेशाब एकदम सफेद, शीतल, गन्धहीन, थोड़ा
और चिकना होता है।
शुक्र प्रमेह—पेशाब वीर्य के समान होता है।