रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१४ असली कोकशास्त्र
दे। बाद दो सेर मिश्री की चासनी में इनके छटाँक छटाँक के लड्डू
बना डाले। प्रतिदिन सबेरे एक लड्डू खाने से सब तरह के प्रदर
रोग दूर होते हैं।
रक्त प्रदर के लिए यत्न—आम की गुठली का चूर्ण करके घी,
चीनी और मैदा के साथ इसे पका कर हलुआ बनाकर खिलाना
हितकर है। या कुकरौंधा नामक बूटी को जड़-सहित कुचल कर
एक तोला स्वरस निकाल लो, बाद उसमें शहद मिलाकर सुबह
शाम सेवन करो। इससे भी रक्तप्रदर जल्द शान्त हो जाता है।
यह तो हुआ प्रदर रोग का परिचय। अब प्रमेह की व्याख्या
देखिये। हम पहले ही कह आये हैं कि यह रोग पुरुषों को हुआ
करता है। यह भी प्रदर रोग की तरह निर्बलता के कारण ही
उत्पन्न होता है। यह रोग बड़ा ही भयंकर है। इसके उत्पन्न होते
ही यदि चिकित्सा नहीं की जाय तो यह जड़ पकड़ लेता है और
कुछ ही दिनों में मधुमेह के रूप में परिवर्त्तित होकर असाध्य हो
जाता है। फिर तो यह जीवन का अन्त किये बिना विश्राम ही नहीं
लेता। इस लिए प्रमेह की दवा करने में आलस्य करना जीवन से
हाथ धोना है।
मिहनत न करने से, हस्त-मैथुन करने से, गुदा मैथुन करने से,
अप्राकृतिक मैथुन करने से, अधिक स्त्री-प्रसंग करने से, दिन-रात
खूब सोने से, मादक वस्तुओं के सेवन करने से तथा मांस खाने से
यह संहारकारी भयंकर रोग पैदा होता है।