रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१६ असली कोकशास्त्र
सुरा प्रमेह—पेशाब ऊपर से शराब की तरह साफ और नीचे
गाढ़ा होता है ।
पिष्ट प्रमेह—पिसे हुए चावल के पानी के समान और अधिक
पेशाब होता है । मूत्र-त्याग करते समय रोमाञ्च हो आता है ।
शीत प्रमेह—पेशाब मीठा और अधिक होता है तथा ठण्ढक
बहुत रहती है ।
सिकता प्रमेह—पेशाब में बालू के समान कड़े कण गिरते हैं ।
शीशी में रखने से ये कण मालूम होते हैं ।
शनैर्मेह—पेशाब थोड़ा और रुक रुक कर उतरता है ।
लार प्रमेह—मुख की लार के समान चिकना पेशाब उतरता है ।
पित्तज प्रमेह
मांञ्जिष्ठ प्रमेह—पेशाब का रंग मजीठ के काढ़े के समान और
दुर्गन्धयुक्त होता है ।
रक्त प्रमेह—पेशाब खून के समान लाल, खारा और दुर्गन्ध-
युक्त होता है ।
हरिद्र प्रमेह—पेशाब करते समय जलन होती है और उसका
रंग हल्दी की तरह पीला होता है ।
नील प्रमेह—नीले रंग का पेशाब होता है ।
क्षार प्रमेह—खारे जल के समान वर्ण, रस, स्पर्श और गन्ध
का पेशाब होता है ।
काल प्रमेह—काले रंग का पेशाब होता है ।