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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 200, कुल 440 में से

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१३ असली कोकशास्त्र १६३
आन्तरिक दुःखों को भूल जायगा, उसकी थकावट दूर हो जायगी
और वह सच्चे प्रेम का अनुभव कर परम सुखी होगा। वह सुखी
होकर तुम्हारी शुभ कामनायें सोचने लगेगा। जब वह घर से जाने
लगे तब भी प्रेमपूर्वक प्रसन्न-मुख होकर नमस्ते करना चाहिए।
इसका प्रभाव उस पर यह होता है कि वह बाहर काम से छुट्टी
पाने पर घर की ओर आने के लिए व्याकुल हो जाता है और कोई
उपहार में देने योग्य नयी वस्तु भी लाने से नहीं चूकता।
८—सुन्दर वस्त्र और आभूषणों को पहन कर पत्नी को चाहिए
कि वह हाव-भाव के साथ वेश्या की तरह पति को रिझाये। वेश्या
धन की लालसा से झूठा प्रेम दिखाकर पुरुषों को मोहती हैं और
उनका छल, बल, कल से सब धन हरण कर लेती हैं। कहना
चाहिए कि उनकी इच्छा पूरी हो जाती है। यदि स्त्री भी उपरोक्त-
बलाओं से काम लेकर पति को मोह ले तो उसे भी रति-सुख और
प्रेम की प्राप्ति अवश्य हो जायगी, और उनका अटूट सम्बन्ध
स्थिर रहेगा।
९—जिस प्रकार माता बड़े प्रेम के साथ बच्चे को भोजन
कराते हुए मीठे-मीठे बचन कहती और तरह-तरह के मन बहलाने
वाले चुटकले कहती है। प्रत्येक खाद्य-पदार्थ की तारीफ कर अधिक
खिलाने की तरकीब करती है। कहती है—अभी तुमने कुछ नहीं
खाया, तुम्हारी भूख घट गयी है, ऐसा करने से शरीर कैसे बना
रहेगा, इत्यादि अनेकविध बचनों से उत्साहित करती है तथा