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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 201, कुल 440 में से

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१६४ असली कोकशास्त्र
भोजन भी बदल-बदल कर तरह-तरह के बनाती है। यह है सच्चा
मातृ-प्रेम। कुलटा माताओं में यह प्रेम नहीं होता। वैसे पत्नी को
भी खिलाने पिलाने में सच्चे मातृ-प्रेम वाली माता के समान
व्यवहार करने वाली बनना चाहिए।
१०—स्त्री को चाहिए बच्चों की सफाई का ध्यान रक्खे।
इससे बच्चे निरोग और बुद्धिमान् होते हैं। जब वे बड़े हों तब
उन्हें बड़ों के प्रति बोलने के छोटे-छोटे वाक्य सिखाने चाहिएँ।
वर्णमाला का शुद्ध उच्चारण कराना सिखाना चाहिए। उस समय
जिन वर्णों का उच्चारण बच्चा शुद्ध नहीं कर पाता वह थोड़े ही
प्रयास से ठीक हो जाता है। उसका बहुत कोमल जबान होती है।
किन्तु यदि उस समय ध्यान न दिया जाय तो फिर सुधारना बड़ा
कठिन हो जाता है।
११—घर की छोटी से लेकर बड़ी वस्तु तक कोई भी बिना
पति की राय के किसी को न देना चाहिए। तुम्हें नहीं मालूम पति
को इन वस्तुओं के जुटाने में किन-किन मुसीबतों का सामना करना
पड़ा। वह यदि फिर जुटाने की शक्ति रक्खेगा तो तुम्हें आज्ञा दे
देगा। अन्यथा समय पर तकलीफ उठानी पड़ेगी और पति से भी
दो बात सुननी पड़ेगी।
१२—बिना पति की आज्ञा के किसी से कोई वस्तु लेनी भी न
चाहिए। क्योंकि उस वस्तु को देखकर पति के मन में सन्देह उत्पन्न
हो सकता है। ऐसे कुलटा स्त्रियों के व्यवहार देखे गये हैं कि वे