रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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ताकि उन्हें दुबारा कहने की आवश्यकता न पड़े । जब बोलो तब
बड़े प्रेम के साथ बोलो । ये सब मोहनास्त्र हैं, इनका प्रयोग करना
जो स्त्री जान जाती है वह शीघ्र ही पति को अपने वश में कर
लेती है ।
६—अपनी भी शकल-सूरत किसी को मनचाही नहीं मिलती ।
यदि पति ही मनचाही शकल का नहीं मिला तो इसमें किसका
दोष कहा जाय । इस पर भी अपनी सूरत सभी को प्यारी मालूम
होती है । भाग्य-रेखा से पति-पत्नी का संयोग होता है, उसी पर
सन्तोष रखना चाहिए, चाहे वह सरूप हो या कुरूप । यदि तुम
उससे अधिक रूपवती होगी तो वह तुमसे अधिक प्रेम करेगा ।
तुम रूपगर्विता होकर उसके प्रेम की उपेक्षा न करो, बल्कि अपनाओ
और दूने उत्साह से उसका स्वागत करो, वह तुम्हें प्यारा लगने
लगेगा । सच्चे प्रेम का पाना बड़ी तपस्या का फल है। वह समान
रूप वाले या कुछ कम रूप वाले पुरुष से प्राप्त हो सकता है,
अधिक रूपवाले से नहीं । अधिक रूपवान् पुरुष भ्रमर की तरह
अनेक कलियों का रस चूसना चाहते हैं। उन्हें अपने रूप का गर्व
होता है । वे किसी एक रमणी से प्रेम नहीं करते; उनका क्षणिक-
प्रेम होता है, स्थिर नहीं । विरला ही कोई स्वरूपवान् पुरुष
पत्नी-व्रती होता है ।
७—पति जब बाहर से घर आये, उसका प्रसन्न मुख होकर
अभिवादन करते हुए स्वागत करो। पति तुम्हारे इस व्यवहार से