रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७६ असली कोकशास्त्र
चौथा—अँगुलियों के अगले हिस्से, पाँवों की एड़ियें, सिर
और बाल के भुजाओं के माँसल भाग गोल होने चाहिएँ।
पाँचवाँ—सिर के बाल, अँगुलियाँ, पलकें और नेत्र लम्बे होने
चाहिएँ।
छठवाँ—जंघा, नितम्ब, गर्दन और पिंडलियाँ, ये स्थान भरे
हुए और स्थूल होने चाहिएँ।—
सातवाँ—स्तन, कन्धे, आँख और मस्तक बड़े विशाल होने
चाहिएँ।
आठवाँ—नाक, कान नोकीले न छोटे न बहुत बड़े समान
आकार वाले होने चाहिएँ।
नवाँ—पेट लम्बा किन्तु बढ़ा हुआ नहीं होना चाहिए।
दसवाँ—कमर पतली किन्तु मजबूत होनी आवश्यक है।
आचार्यों ने शरीर के रंग का विशेष पृथक् वर्णन नहीं किया।
इससे मालूम होता है उन्होंने शरीर की बनावट को विशेष महत्त्व
दिया है। कपोलों के रंग की लाली से कुछ झलक दिखाया देती है
सम्भव है वह सब शरीर पर लागू समझी जाय।
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