रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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की होती है। उनको कामनायें पूर्ण नहीं होतीं, वे अपूर्ण-की-अपूर्ण
मन में रह जाती हैं क्योंकि शास्त्र का कथन है—
न जातु कामः कामानामुपभोगेन शाम्यति ।
हविषा कृष्णवर्त्मेव भूय एवाभिवर्द्धते ॥
काम भोग से शान्त नहीं होता प्रत्युत भोगने से ओर भी बढ़ता
है । जिस तरह की अग्नि में घी डालने से अग्नि और भी बढ़ती है ।
—:०:—
स्त्री सौन्दर्य
स्त्री शरीर के किन-किन अवयवों की कैसी गठन होनी चाहिये
जिससे शरीर सुन्दर प्रतीत होने लगे । आचार्यों ने इन बातों पर
विचार करते हुए कुछ बातें दर्शायी हैं ।
पहला—आँख, सरस, और चमकीली, एवं साफ होनी चाहिये ।
मुख कान्तिवान् अर्थात् पुरजलाल हो, दाँत उज्ज्वल चमकीले और
समान पंक्तिबद्ध हों, अंगुलियों के नाखून स्वच्छ और गोलाई लिये
हुए होने चाहिएँ ।
दूसरा—आँखों की पुतलियाँ, पलकों के बाल, भृकुटी के बाल,
तथा सिर के बाल, ये सब भौंरे के ससान काले-स्याह होने चाहिएँ ।
तीसरा—अधर, जिह्वा, मसूड़े ओर कपोल ( गाल ) ये सब
बिम्ब-फल के समान लाल होने चाहिएँ ।