रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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स्त्री के सोलह शृङ्गार
आदौ मज्जन-चीर-चारु-तिलकं नेत्राञ्जनं कुण्डलम् ।
नासा मौक्तिक-हार-केशकुसुमं सिन्दूर वस्त्रं परम् ॥
देहे चन्दनलेप-कञ्चुकमणी क्षुद्रावली घण्टिका ।
ताम्बूलं करकंकणं चतुरता शृङ्गार का षोडश ॥
( १ ) सबसे पहले दाँतों में मञ्जन फिर उबटन तब स्नान
करना चाहिए। मञ्जन और उबटन स्नान के ही अंग हैं इस लिए
उनकी पृथक गणना नहीं की गयी । मञ्जन से दाँतों की सफाई
और उबटन से शरीर की खाल में कोमलता आती है। तत्पश्चात्
स्नान करने से सर्वस्नान कहाता है अन्यथा एकांगी या अर्द्धस्नान
कहा सकता है ।
( २ ) दूसरा स्नान के बाद सुन्दर साड़ी आदि वस्त्र धारण
करना ।
( ३ ) तीसरा तिलक अर्थात् ललाट में सिन्दूर आदि की
बिन्दी लगाना ।
( ४ ) चौथा आँखों में अञ्जन या काजल लगाना । इससे
आँख की ज्योति और सौन्दर्य दोनों बढ़ते हैं। तथा नेत्ररोग नाश
होते हैं ।
( ५ ) पाँचवाँ, कान में कुण्डल या कर्णफूल आदि पहनना ।