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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 130, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र १२७
चलितक चुम्बन
प्रमत्तस्य विवदमानस्य वाऽन्यतोऽभिमुखस्य
सुप्ताभिमुखस्य वा निद्राव्याघातार्थं चलितकम् ॥
उन्मत्त पुरुष स्त्री से विवाद कर रहा हो अथवा अन्य किसी
ओर मन लगाये हुए हो या तन्द्रा से झपकियाँ ले रहा हो । उस
समय उसे सावधान कर अपनी ओर आकृष्ट करने के लिये जो
स्त्री से चुम्बन किया जाता है उसे चलितक चुम्बन कहते हैं ।
उपरोक्त किसी प्रकार विक्षिप्त पति को काम चेष्टार्थ आह्वाहन करने
के लिये पत्नी को चाहिए कि वह ऊपर कहे साधारण चुम्बन का
अवलम्बन करे ।
प्रातिबोधित चुम्बन
चिरात्रादागतस्य शयनसुप्तायाः
स्वाभिप्रायचुम्बनं प्रातिबोधिकम् ।
रात्रि को देर करके घर आने पर, सोयी हुई स्त्री को जगाने
की इच्छा से जो चुम्बन किया जाता है उसे प्रातिबोधित चुम्बन
कहते हैं । इस प्रकार मृदु उपचार से जगाने पर स्त्री को किसी
प्रकार का कष्ट नहीं होता ओर वह पुरुष के अभिप्राय को समझ
जाती है । तथा स्त्री को इस बात का अभिमान होता है कि पति
उससे प्रेम करता है ।