रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२८ असली कोकशास्त्र
समौष्ठ चुम्बन
पति के दोनों ओष्ठों को पत्नि अपने ओष्ठों में दबाकर जब
उस पर जिह्वा घर्षण करती है, उसको समौष्ठ चुम्बन कहते हैं।
यह पंचशायक का कथन है।
नखक्षत
यह प्रयोग भी कामाग्नि प्रज्ज्वलिका करने के लिए ही काम में
लाया जाता है। जिन स्त्री पुरुषों की स्पार्शन शक्ति कमजोर होती
है, और उनमें कामोद्वेग की उत्पत्ति नहीं हो पाती, उनमें नखच्छेद
से ही रति का आविर्भाव हो आता है अथवा जिस समय स्त्री पुरुष
अत्यन्त उन्मत्त होकर अपने आपको भूल से जाते हैं, उस समय
इसके प्रयोग से विषय-जनित आनन्द उत्पन्न किया जाता है।
इसका प्रयोग इस समय प्रायः लुप्त-सा हो गया है, इस कारण
रति के एक अंग की हानि ही समझनी चाहिए। इसके अभाव से
स्पार्शन शक्ति विहीन नर-नारियों की तृप्ति नहीं हो पाती। और
उन्मत्त नारि की भी वही दशा होती है, इस लिए इस कला का
जानना अत्यन्त उपयोगी है। जिसका दिग्दर्शन आचार्यों ने जिस
प्रकार किया है। नीचे दिया जाता है।
आच्छुरित नखच्छेद
प्रयोज्यायाश्च तस्याङ्गसंवाहने शिरसः कण्डूयने
पिटकभेदने व्याकुलीकरणे भीषणे च प्रयोगः ॥