रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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नखच्छेद का प्रयोग भी करती है। पुनः पुनः पति से छेड़े जाने पर
फिर चुम्बन द्यूत के लिए तैयार हो जाती है। संयोगवश अथवा
पति उसका मान रखने के लिए उसे जिता देता है। उस अवस्था
का वर्णन आचार्य करते हैं—
विश्रब्धस्य प्रमत्तस्य वाऽधरमवगृह्य दशनान्त-
र्गतमनिर्गमं कृत्वा हसंदुत्क्रोशेत्तर्जयेद्गोदाहयेन्मु-
त्येत्प्रनर्तितभ्रु णा च विचलनयनेन मुखेन विहसन्ती
तानि तानि च ब्रूयादिति चुम्बनद्यू तकलहः॥
अधरोष्ठ को पकड़े हुए हँसती है ओर कहती कि यदि छुड़ाने
की चेष्टा करोगे तो काटे बिना न छोड़ूँगी। उन्मत्त की भाँति
उत्तेजित होकर भ्रुवों को नचाती, नयन मटकाती, तथा व्यंग बाण
बरसाती हुई विनोद भरे तिरस्कार पूर्ण वाक्य बोलती है।
राग संदीपक चुम्बन
काम पीड़िता नारी भोग की अभिलाषा से जब सोते हुए पति
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