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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 13, कुल 440 में से

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१२ असली कोकशास्त्र
महाराज ने कहा,—तो हम ऐसी स्त्रियों का क्या प्रबंध कर
सकते हैं ?
मंत्री ने कहा,—रति-शास्त्र सम्बन्धी ग्रन्थों का मैंने अध्ययन
किया है। सम्भव है मैं इसे सन्तोष दिला सकूँ। बाह्य-रति इसका
परम औषध है। आगे आपकी जैसी इच्छा हो।
उस कामिनी ने कहा,—मेरा अभी विवाह किसी से नहीं हुआ
है। मैं विवाह की इच्छा से ही बाहर निकली हूँ। मैंने जिस जिस
वर को चुना, उसी ने मेरी प्रतिज्ञा को सुनकर मुझसे विवाह करने
से इनकार कर दिया। सम्भव है मेरी उस प्रतिज्ञा तथा उसका
कारण जानने की इच्छा आप को भी हुई होगी। इस लिये मैं
उसे स्पष्ट किये देती हूँ।
जब मैं विवाह योग्य हुई, मेरे घर पर विवाह के पैगाम आने
लगे। मेरी बहुत सी मिलनसार सखियें थीं, जिनकी गोद में एक-
एक दो-दो सन्तानें खेल रही थीं। उन्होंने कहा,—तुम हमारा
कहा मानो तो विवाह मत करो, नहीं तो पछताभोगी। क्योंकि
हमारा तुम्हारा एक ही स्वभाव है। विवाह से तुम्हें सुख नहीं
मिलेगा। यदि तुम्हें सन्तान की इच्छा हो तो हमसे सन्तान गोद
लेकर पाल-पोष सकती हो।
तब मैंने कहा,—क्या विवाह सन्तान-सुख के लिये ही किया
जाता है ? और कोई प्रयोजन नहीं ?
तब सखियों की ओर से मुझे यह जवाब मिला कि हाँ, शास्त्र