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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

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असली कोकशास्त्र १३
मर्यादा तो यही है, किन्तु तुम्हारी अभिलाषा भी हम समझती हैं।
धर्म-मर्यादा में रहते हुए उसका पूरा होना कठिन है। क्योंकि
लिखा है—“काम अष्टगुणः स्मृतः ।” अर्थात् स्त्रियों में आठ
गुना काम होता है। उसे दबाने के लिये अष्टगुणी कामी पुरुष की
आवश्यकता है। जिसका मिलना असंभव है। धर्म-मर्यादा में एक
पति से अधिक हो नहीं सकता, इस लिये काम शान्ति हो
नहीं सकती। अतएव हम सब पछता रही हैं और तुम्हें सावधान
करती हैं।
सखियों का ऐसा कथन सुनकर मैंने ऐसी प्रतिज्ञा की कि जब
तक मेरी इच्छा पूर्ण करने वाला कोई वर नहीं मिलेगा तब तक मैं
विवाह ही नहीं करूँगी। सो बराबर कई वर्ष से अनुकूल वर की
खोज में घूम रही हूँ किन्तु अभी तक जब कोई नहीं मिला तब
मैंने सोचा शायद राज-द्वार में मिल जाय। इसी लिये यहाँ आयी
थी, किन्तु अष्टगुणी पुरुष...
कोका पण्डित ने बीच ही में रोककर कहा,—तुम्हारे द्वार
में आते ही प्रश्नोत्तर से मैंने निश्चय कर लिया था कि तुम हस्तिनी
जाति की स्त्री हो। रहा अष्टगुणा कामी पुरुष, सो उसका मिलना
नितान्त असंभव है। किन्तु तुम निराश न हो। तुम्हारी आशा
पूरी हो जायगी। स्त्री की इच्छा पूरी करने के लिये अधिक कामी
पुरुष की आवश्यकता नहीं, केवल कुछ क्रियाओं का ज्ञान होना
चाहिये।