रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)
Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation
रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २२ )
का विभीषण की योग्यता राम को समझाना—२६७, १७ विभीषण की स्तुति—२६८;
१८ त्रिकूट पर्वत की उत्पत्ति की कथा—२६६, १६ विभीषण का राम को रावण के
वैभव का परिचय देना—२६६, २० राम का विभीषण को लका का राजा बनाना—
२७१, २१ शुक का सन्देश—२७१, २२ गम का दर्भ-शयन—२७२, २३ राम का
समुद्र पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना—२७३, २४ समुद्र का राम से प्रार्थना करना—
२७५, २५ सेतु-बन्धन के लिए राम का सुग्रीव को आज्ञा देना—२७६, २६ सेतु-
बन्धन—२७७, २७ चन्द्रोदय का वर्णन—२७७, २८ गिलहरी की भक्ति—२७६,
२६ सेतु को देखकर राम का हर्षित होना—२८०, ३० राघवो का सुवेलाद्रि पर
पहुँचना—२८१, ३१ कैकसी का हितोपदेश—२८२, ३२ शुक तथा सारण का राम की
सैन्य-शक्ति का परिचय पाना—२८४, ३३ सारण का रावण को कपियों का परिचय
देना—२८५, ३४ शुक का रावण को राम का पराक्रम सुनाना—२८७, ३५ राम के
माया-धनुष तथा सिर दिखाकर सीता को भयभीत करना—२८८, ३६ माल्यवान् का
हितोपदेश—२६०, ३७ सुवेलाद्रि पर से राम-लक्ष्मण का लका को देखना—२६२,
३८ रावण तथा सुग्रीव का द्वंद्व-युद्ध—२६३, ३६ अंगद का दौत्य—२६५, ४० रावण
का अपना वैभव प्रदर्शित करना—२६७, ४१ रामका रावणके छत्र-चामरो पर अस्त्र
चलाना—२६८; ४२ रावण का राम की धनुर्विद्या का प्रशसा करना—२६६, ४३
वानरोका लका ध्वंस करना—२६६, ४४ राक्षसो तथा वानरो का भीषण संग्राम—
३००, ४५ युद्धभूमि का वर्णन—३०२, ४६ इन्द्रजीत का माया-युद्ध—३०४, ४७
नाग-पाशबद्ध दाशरथियो को देख सीता का दु खी होना—३०६, ४८ लक्ष्मण के लिए
राम का विलाप करना—३०८, ४६ विभीषण तथा अंगद का वानरो को धैर्य देना—
३०६, ५० नारद का आगमन—३१०, ५१ राघवो का नाग-पाश से मुक्त होना—
३१०, ५२ धूम्राक्ष का युद्ध—३१२, ५३ अकपन का युद्ध—३१३, ५४ महाकाय
का युद्ध—३१५, ५५ अंगद के द्वारा महाकाय का सहार—३१६, ५६ प्रहस्त का
युद्ध—३२०, ५७ नील के द्वारा प्रहस्त का वध—३२२, ५८ मदोदरी के हित-वचन—
३२३, ५६ मंदोदरी की मंत्रणा की उपेक्षा करना—३२४, ६० रावण का प्रथम
युद्ध—३२४, ६१ विभीषण का राम को राक्षस-वीरो का परिचय देना, ६२ हनुमान्
का रावण से युद्ध करके मूच्छित होना—३२७, ६३ नील का रावण से युद्ध करना—
३२८, ६४ रावण का ब्रह्मशक्ति से लक्ष्मण को गिराना—३२६, ६५ राम-रावण
का प्रथम युद्ध—३३०, ६६ रावण का खिन्न होकर लका लौट जाना—३३१;
६७ राक्षसो का कुंभकर्ण को जगाना—३३१, ६८ राघवो की युद्ध-यात्रा पर कुंभकर्ण का
क्रुद्ध होना—३३३, ६६ कुंभकर्ण का शाप-वृत्तान्त—३३५, ७० कुंभकर्ण का हितोपदेश—
३३६, ७१ रावण का कुंभकर्ण के उपदेश का तिरस्कार करना—३३८, ७२ कुंभ-
कर्ण की गर्वोक्तियाँ—३३६, ७३ कुंभकर्ण का युद्ध के लिए जाना—३४०, ७४ वानर-
कुंभकर्ण का युद्ध—३४१; ७५ कुंभकर्ण और हनुमान् का युद्ध—३४४, ७६ सुग्रीव
तथा कुंभकर्ण का युद्ध—३४५, ७७ कुंभकर्ण का मूर्च्छित सुग्रीव को लका ले जाना—३४५,
७८ कुंभकर्ण का वानर-सेना को तहस-नहस करना—३४६, ७६ विभीषण कुंभकर्ण और का