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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

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पृष्ठ 27

( २३ )
वार्त्तालाप—३४८, ८० श्रीराम के द्वारा कुभकर्ण का सहार—३५०; ८१ कुभकण की
मृत्यु पर रावण का शोक—३५१, ८२ अतिकाय तथा महोदर आदि राक्षसो की युद्ध-
यात्रा--३५२, ८३ अगद तथा नरातक का द्वद्व-युद्ध--३५५, ८४ देवांतक तथा त्रिशिर
का अंगद पर आक्रमण करना--३५६, ८५ हनुमान् आदि वीरो के द्वारा त्रिशिर आदि
राक्षसो का वध--३५६, ८६ अतिकाय का युद्ध--३५७, ८७ लक्ष्मण तथा अतिकाय
का द्वन्द्व-युद्ध—३६०, ८८ अतिकाय का वध—३६१, ८६ इद्रजीत का द्वितीय युद्ध—
३६२, ६० ब्रह्मास्त्र से इन्द्रजीत का राम-लक्ष्मण आदि को मूर्च्छित करना—३६४;
६१ हनमान् का ओषधी-शैल लाकर वानरो की मूर्च्छा दूर करना—३६६, ६२ वानरो
का लका जलाना--३६८, ६३ कुभ-निकुभ का युद्ध के लिए प्रस्थान--३६६, ६४
सुग्रीव के द्वारा कुभ का वध--३७२, ६५ मकराक्ष का युद्ध--३७३, ६६ इन्द्रजीत
का तृतीय युद्ध--३७४, ६७ इन्द्रजीत का होम करना तथा कृति नामक शक्ति प्राप्त
करना—३७५, ६८ रामका आग्नेय अस्त्र से इन्द्रजीत की मायाको दूर करना—
३७६, ६६ इन्द्रजीत का यज्ञ करके रथ प्राप्त करना—३७८, १०० इन्द्रजीत का
माया-सीता का सिर काटना—३८१, १०१ इन्द्रजीत का निकुभिल-यज्ञ करना—३८२,
१०२ लक्ष्मण का शोक—३८३, १०३ इन्द्रजीत की माया को विभीषण का राघवो
को समझाना—३८४, १०४ लक्ष्मण का युद्ध के लिए प्रस्थान--३८५, १०५ निकुभिल-
होम में विघ्न--३८५, १०६ लक्ष्मण तथा इन्द्रजीत का परस्पर तिरस्कार के
वचन कहना—३८६, १०७ इन्द्रजीत तथा लक्ष्मण का युद्ध—३८७, १०८ इन्द्रजीत
का वध—३६०, १०६ इन्द्रजीत की मृत्यु पर रावण का शोक—३६३, ११० रावण
का सीता का वध करने के लिए जाना--३६४, १११ इन्द्रजीत की स्त्री सुलोचना
का शोक—३६५, ११२ सुलोचना का राम की स्तुति करना--३६७, ११३ सुलोचना
का सहगमन--३६६, ११४ रावण का अपनी प्रधान सेना को युद्ध के लिए भेजना--
४००, ११५ वानर-सेना को हनुमान् आदि का प्रोत्साहन देना--४०२, ११६ राक्षस-
स्त्रियो का रावण की निन्दा करना—४०३, ११७ रावण का द्वितीय युद्ध—४०५,
११८ सुग्रीव के द्वारा विरूपाक्ष आदि राक्षसो का वध--४०७, ११९ रावण का राघवौं
पर आक्रमण करना--४०६, १२० रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना—
४११, १२१ रावण का चितित होना—४१२, १२२ लक्ष्मण की मूर्च्छा पर राम का
शोक—४१४, १२३ सजीवनी लाने के लिए हनुमान् का द्रोणाद्रि को जाना—४१५,
१२४ कालनेमि का वृत्तात—४१६, १२५ मकरी का हनुमान् को निगल जाना--४१८,
१२६ धान्यमालिनी का वृत्तात—४१६, १२७ कालनेमि का वध—४२१, १२८ भरत
का स्वप्न--४२२, १२६ हनुमान् का माल्यवान् से युद्ध करना—४२३, १३० लक्ष्मण
के लिए राघव का शोक—४२४, १३१ हनुमान् का द्रोण-पर्वत ले आना—४२६,
१३२ सजीवकरणी से लक्ष्मण की मूर्च्छा दूर होना—४२७, १३३ रावण का शुक्राचार्य
से परामर्श करना—४२६, १३४ पाताल-होम--४२६, १३५ अगद का मदोदरी को
रावण के पास घसीटकर लाना—४३१, १३६ रावण को मन्दोदरी का राघव की