सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 508 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 25

( २१ )
५ वालि-सुग्रीव का द्वंद्व-युद्ध--१८३ ; ६ तारा का वालि को रोकना--१८४ ;
७ वालि का सहार--१८७, ८ तारा का शोक--१८६; ९ वालिका सुग्रीव को उपदेश
देना--१६१, १० सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाना--१६२, ११ राम का माल्य-
वत पर पहुँचना--१६३, १२ लक्ष्मण का किष्किंधा में जाना--१६५; १३ सुग्रीव का
माल्यवत पर पहुँचना--१६७, १४ सीता के अन्वेषण के लिए सुग्रीव का वानरो को
भेजना--१६८, १५ हनुमान् को मुद्रिका देना--१६६, १६ महर्षि कडु के आश्रम
में--२०१, १७ स्वयंप्रभा का सत्कार--२०२, १८ वानरो की व्याकुलता--२०३,
१६ सपाति से भेंट--२०४, २० सीता का पता बताना--२०५, २१ वानरो का
अपनी शक्ति का परिचय देना--२०६, २२ समुद्र लाँघने के लिए हनुमान् को प्रेरित
करना--२०७, २३ समुद्र पार करना--मैनाक से भेंट--२०८ ।
सुन्दरकांड २१९-२४६
१ हनुमान् का लका में प्रवेश--२१३, २ लकिणी का हनुमान् को रोकना--
२१४, ३ हनुमान् का लका में सीता का अन्वेषण -- २१५, ४ हनुमान् का रावण
के अत पुर में प्रवेश करना--२१६, ५ हनुमान् का रावण के उद्यान में जाना--२१८,
६ हनुमान् की सीता से भेंट--२१६, ७ सीता से रावण का प्रलाप--२२०, ८ सीता
का रावण की निन्दा करना--२२२, ६ मन्दोदरी का रावण को उपदेश--२२३;
१० राक्षसियो का सीता को दुख देना--२२४, ११ त्रिजटा का स्वप्न--२२४,
१२ हनुमान् का सीता को राघवो का वृत्तात सुनाना--२२५, १३ हनुमान् का सीता
को राम की अँगूठी देना--२२६, १४ सीता का सदेह--२२६, १५ अशोकवन का
ध्वस--२३०, १६ हनुमान् का राक्षसो का वध करना--२३१, १७ अक्षयकुमार का
हनुमान् पर आक्रमण करना--२३५, १८ इन्द्रजीत का हनुमान् को वन्दी बनाना--
२३७, १६ हनुमान् का रावण को अपने आगमन का कारण बताना--२३८, २०
लका-दहन--२३६, २१ अगद आदि वानरो से हनुमान् की भेंट--२४२, २२ वानरो का
मधुवन में विचरण करना--२४३, २३ राम को सीता का कुशल-समाचार सुनाना-२४४।
युद्धकांड २४७-४७७
१ श्रीराम का हनुमान् की प्रशसा करना--२४६, २ लका के वैभव का वर्णन--
२५०, ३ कपि-सेनाओ की युद्ध-यात्रा--२५२, ४ महेन्द्र पर्वत से राम का समुद्र
को देखना--२५३, ५ सध्या-वर्णन--२५४, ६ मत्रियो के साथ रावण की मत्रणा--
२५५, ७ दानव-वीरो के दर्पपूर्ण वचन--२५६, ८ राक्षस-वीरो को विभीषण का
उपदेश--२५७, ६ रावण को विभीषण का हितोपदेश--२५८, १० कुभकर्ण को सीता-
पहरण का वृत्तात सुनाना--२६०, ११ इन्द्रजीत का विभीषण को अपने पराक्रम का
परिचय देना--२६२; १२ विभीषण द्वारा इन्द्रजीत के दभ की निंदा--२६२, १३
रावण का विभीषण को नगर से निर्वासित करना--२६३, १४ विभीषण का अपनी
माता के भवन में जाना--२६५, १५ विभीषण की शरणागति--२६६, १६ हनुमान