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रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

रंगनाथ रामायण (प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय रामायण - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी अनुवाद)

Ranganatha Ramayana: Complete Hindi Translation

रंगनाथ कवि (हिन्दी अनुवादक: अवधेश गुप्त) द्वारा

DevanagariHindipublished508 पृष्ठ

पृष्ठ 257, कुल 508 में से

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पृष्ठ 257

सदा सतप्त रहने के कारण रघुराम की अँगूठी देखकर भी मुझे विश्वास नही हो रहा है ।
तुम कौन हो ? सूर्यकुलाधिप का रूप कैसा है ? उनके अनुज सौमित्र का रूप
कैसा है ? मेरे प्रभु अब कहाँ रहते है ? उन्होंने तुम्हें कौन-सा संदेश सुनाने के लिए
भेजा है ? तुम किस प्रकार समुद्र पार करके यहाँ आये ? तुम इन सब बातों का उत्तर दो,
ताकि मुझे विश्वास हो जाय ।'
तब हनुमान् सीता से इस प्रकार कहने लगा—'हे देवी, वायुदेव के वर-प्रसाद से
केसरी नामक एक कपि-श्रेष्ठ तथा अञ्जना देवी के पुत्र के रूप में मेरा जन्म हुआ । मेरा
नाम हनुमान् है । इस पृथ्वी पर सुग्रीव नामक वानर-राजा का मैं विश्वस्त मंत्री हूँ ।
उनके भाई बालि ने उनके राज्य तथा पत्नी को उनसे छीन लिया था । तब से वे अपने
चार मंत्रियों के साथ ऋष्यमूक पर्वत पर रहते थे। दशकंठ जब कपट रूप से आपको लिये
जा रहा था, तब मैंने आपका विलाप सुना और सिर उठाकर आपकी ओर देखते रहे ।
आपने भी हमें देखा और एक वस्त्र में बाँधकर अपने कुछ आभूषण पृथ्वी पर गिरा दिये ।
उन आभूषणों को सुग्रीव ने सुरक्षित रखा। उसके पश्चात् रघुराम आपका अन्वेषण