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रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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( ३६ )
पिउ सँग प्रेम कबहुँ नहिँ पायो, करनी कवन बिसारी ।
चक१ को ध्यान दधिसुत२ सोँ हेत है, योँ तुम ते मैँ न्यारी ॥१॥
भवसागर मोहिँ इक टक जोवत, तलफत रजनी जाई ।
पिय बिन सेजइ क्यों सुख सोऊँ, बिरह बिथा तन खाई ॥२॥
मेटि दुहाग सुहागिन कीजै, अपने अंग लगाई ।
कह रैदास स्वामी क्यों बिछोहे, एक पलक जुग जाई ॥३॥
—०—
( राग जैतिश्री )
॥ ७४ ॥
सब कछु करत न कहौँ कछु कैसे ।
गुन बिधि बहुत रहत ससि जैसे ॥टेक॥
दरपन गगन अनिल३ अलेप जस ।
गंध जलधि प्रतिबिंब देखि तस ॥१॥
सब आरम्भ अकाम अनेहा ।
बिधि निषेध कीयौ अनेकेहा ॥२॥
यह पद कहत सुनत जेहि आवै ।
कह रैदास सुकृति को पावै ॥३॥
—०:—
( राग धनाश्री )
॥ ७५ ॥
तेरे देव कमलापति सरन आया ।
मुझ जनम संदेह भ्रम छेदि माया ॥टेक॥
अति संसार अपार भवसागर,
जा मेँ जनम मरना संदेह भारी ।
काम भ्रम क्रोध भ्रम लोभ भ्रम मोह भ्रम,
अनत भ्रम छेदि मम करसि यारी ॥१॥
१ चकोर के ऐसा ध्यान । २ चंद्रमा । ३ हवा ।