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रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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( ३७ )
पंच संगी मिलि पीड़ियो प्रान यौँ,
जाय न सक्यो बैराग भागा ।
पुत्रबरग कुल बंधु ते भारजा,
भखै दसो दिसा सिर काल लागा ॥ २ ॥
भगति चितऊँ तो मोह दुख व्यापही,
मोह चितऊँ तो मेरी भगति जाई ।
उभय संदेह मोहिँ रैन दिन व्यापही,
दीनदाता करूँ कवन उपाई ॥ ३ ॥
चपल चेतो नहीं बहुत दुख देखियो,
काम बस मोहिहो करम फंदा ।
सक्ति संबंध कियो ज्ञान पद हरि लियो,
हृदय बिस्वरूपे तजि भयो अंधा ॥ ४ ॥
परम प्रकास अबिनासी अधमोचना,
निरखि निज रूप बिसराम पाया ।
बंदत रैदास बैराग पद चिंतना,
जपौ जगदीस गोबिंद राया ॥ ५ ॥
॥ ७६ ॥
तेरी प्रीति गोपाल सौँ जनि घटै हो ।
मैंँ मोलि महँगै लई तन सटै हो ॥ टेक ॥
हृदय सुमिरन करूँ नैन अवलोकनो,
स्रवनौँ हरि कथा पूरि राखूँ ।
मन मधुकर करौँ चित्त चरना धरौँ,
राम रसायन रसना चाखूँ ॥ १ ॥
साधु संगत बिना भाव नहिँ उपजै,
भाव भगति क्योँ होइ तेरी ।