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सर्वकोश
प्रमाणवार्तिकम् (आचार्य धर्मकीर्ति - मनोरथनन्दि वृत्ति सहित बौद्ध न्याय महाग्रन्थ)

प्रमाणवार्तिकम् (आचार्य धर्मकीर्ति - मनोरथनन्दि वृत्ति सहित बौद्ध न्याय महाग्रन्थ)

Pramanavarttika of Acharya Dharmakirti with Manorathanandin Commentary

आचार्य धर्मकीर्ति (वृत्ति: मनोरथनन्दी, सम्पादक: स्वामी द्वारिकादास शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished532 पृष्ठ

पृष्ठ 153, कुल 532 में से

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पृष्ठ 153

लब्धिःorसाक्षान्निषेध्यानुपलब्धिः? साक्षान्निषेध्यानुपलब्धिः,`

Let's check line 18:
सर्वत्रानुपलम्भतः साध्यते; यस्मात् प्रमाणैरर्थस्य सिद्धिं वदतामर्थात्

Let's check line 19:
सामार्थ्यादेव विपर्ययात् प्रमाणाभावादर्थाभावः सिध्यति ॥ ८५ ॥
Wait, is it सामार्थ्यादेव or सामर्थ्यादेव?
Let's look at line 19 again:
Actually, सा followed by मा with ा? It looks like सामार्थ्यादेव due to an extra stem or सामर्थ्यादेव?
Wait, if it's सामार्थ्याद्देव, let's just transcribe what is printed.
Wait, let's look at सामार्थ्यादेव:
स + ा = सा.
Then म + ा = मा.
Then र् + थ + या = र्थ्या.
Then द + े = दे.
Then व.
Wait, why would it be सामार्थ्या-? In Sanskrit, सामर्थ्य has समर्थस्य भावः = सामर्थ्यम्. There is NO word सामार्थ्य! But could the types