पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। २६६
कोई माड़ें जाहिं धरि जूरी। कोई भात परोसहिं पूरी ॥
कोई लै लै आवहिं थारा। कोई परसहिं बावन परकारा ॥
पहिर जो चीरैं परोसहिं आवहिं। दूसरी और बरनै देखरावहिं ॥
वरण वरण पहिरहिं हर फेरा। आव झुंड जस अफसरै केरा ॥
दो० पुनि संधानै बहु आनी, परसहिं बूकाहिं बूक।
करै सँवार गुंसाई, जहां परी कछु चूक ॥
जानहु नखत करहिं सब सेवा। बिन शशि सूरहिं भावन जेवा ॥
बहु परकारै फिरहिं हर फेरें। हेरौं बहुत न पावा हेरें ॥
परी अमूझ सबै तरकारी। लोनी बिनु लोन सब खारी ॥
मण्डछूवहिं आवहिं गड़कांटी। जहां कमल तहँ हाथ न आँटी ॥
मन लाग्यो तेहि कमल की दंडी। भावै नहिं एको कनैहंडी ॥
सो जेवन नहिं जाकर भूखा। तेहि बिन लाग जानु सब रूखा ॥
अनभावत चाखी बैरागी। पञ्चामृत जानहु बिष लागा ॥
दो० बैठ सिंहासन गूँजै, सिंह चरै नहिं घास।
जबलग मिरगैन पावै, भोजन करै उपास ॥
पान लिये दासी चहुँ ओरा। अमृतैं दानी भरे कचूरौ ॥
पानी देहिं कपूरक बासा। सो नहिं पिये दरश कर प्यासा ॥
दरशन पान देयँ तौ जीऊँ। बिन रसना नयनहिं सो पीऊँ ॥
पपिहा बूँद सेवातिह अघा। कौन काज जो बरसै मघा ॥
पुनि लोटा कोंपरं लै आई। कै निराश अब हाथ धुवाई ॥
हाथ जो धोवैं विरहेंको रोरा। सँवरि सँवरि मन हाथ मरोरा ॥
रोटी १ कपड़ा २ रंग ३ परी ४ अचार ५ राजा ६ चांद ७ सूर्य्य ८
बहुत तरह ६ देखना १० तथा पद्मावंत ११ पहुँचना १२ तरकारी १३ बे
चाहना १४ शेर १५ हिरन १६ शरबत १७ कटोरा १८ जबान १६ सिल-
फ़ची आफ्ताया २० सताया २१ ॥