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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 271

विधि¹मिलावजासोमनलाग। जोरहिं तोर प्रेम कर तागा ॥
दो० हाथ धोय जब बैठो, लीन्ह ऊब के श्वास ।
सँवरा सोई गुसांई, देय निराशहिं आस ॥
भइज्योनार फिरा खँडवॉनी । फिराअ्ररगजाँ कंकहि वानी ॥
नग अमोल सो थारहिं भरे । राजैं सेर्व आन के धरे ॥
बिन्ती कीन्ह घालगयैं पागा । येजगसूर सीवें गुहिलागा ॥
औगुन अश कांप यहिजीऊ । जहां भानु तहँ रहा न सीऊँ ॥
चारहुँ खण्ड भानु अस तपा।जेहिकी दृष्टि¹⁴ रैयनिमसि¹⁵ छिपा॥
औभानुँहिंअस निरमलैकला। दरश जो पावै सो निरमला ॥
कमल भानु देखै पै हँसा । औ भांतेहिं चाहै परकसा ॥
दो० रतैनैश्यामतहँरैंयनिमसिं¹⁷, येरवि²⁰ तिमिरं²¹ सँहार ।
कर सो दृष्टि²⁴ औ कृपा, दिवसैं देह उजियार ॥
सुनबिन्ती²⁶ बेहसाँसुलतानू । सहसैंहि किरणदिपै जसभानूँ ॥
ऐ राजा तुइँ सांच जुड़ावा । भइसो दृष्टिअवसीवैं जुड़ावा ॥
भानु की सेवा जो कर जीव । तेहिमसिकहां कहांतेहिसीवैं ॥
खाउ देश आपन कर सेवा । और देउँ मांडो तोहिं देवा ॥
लीकपषानैं पुरुषैं कर बोला । ध्रुवै सुमेरुँ ऊपर नांहिं डोला ॥
फेर बसावैं दीन्ह नग सूरू । लाभदेखायलीन्हचहिमूरू ॥
हँस हँस बोले टेके कांधा । प्रीतिभुलाय चहै छल बांधा ॥
दो० माया बोल बहुत कर, शाह पान हँस दीन्ह ।
ईश्वर १-२ नाउम्मेद ३ शरवंत ४ अतर ५ नज़र ६ अर्ज़ ७ गर्दन ८
सूर्य ९-११-१३-१७-२२-२६-३१ जाड़ा १०-१२-३०-३२ निगाह १४
रात १५-२० सियाही १६-२१ पाकसाफ़ १८ राजा १६ अंधियारा नाश-
कर२३ अच्छी नज़र २४ दिन २५ अर्ज़ २६ हँसा २७ हज़ार २८ पत्थर ३३
मर्द ३४ नाम नखत ३५ पहाड़ ३६ लालच ३७ जड़ ३८ ॥