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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 269

३६८ पद्मावत ।
राजा की सोरहसै दासी। तिन महँ चुन काढी चौरासी ॥
बरणे बरण सारी पहिराई। निकस मँदिर ते सेवा आई ॥
जनु निसरीं सब बीरबहूटी। रायँसुनी पिंजर हुत छूटी ॥
सबै प्रथम यौबन सोहैं। नयन बानै औ सारँगै भौंहैं ॥
मारहिं धनुर्ष केर शिर श्रोहीं। वनघंटवाट धनुषजित श्रोहीं ॥
कामैकटाक्ष हनहिं चितहरणी। एक एकते आगर बर्रणी ॥
जानहुँ इन्द्रलोक ते काढी। पांतहि पांत भई सब ठाढी ॥
दो० शाह पूँछ राघव पहँ, सबते कही बैनाहिं ।
तुइजोपद्मिनी बरैणी, कहुसोकौनइनमाहिं ॥
दीरघआये भूमिपति११ भारी। इनमें नाहिं पद्मिनी नारी ॥
यहि फुलवारसोबहुकी दासी। कहँ केतकी भँवर सँग बासी ॥
वह सो पदार्थै ये सब मोती। कहँ वह दीप पतँग जहँज्योती ॥
ये सब तरैंई सेव कराहीं। कहँवहशैशिशिदेखतछिपजाहीं ॥
जबलगसूरैकीदृष्टि १७ अकाशु। तवलगशैशिनहिंकरैप्रकार्शू ॥
सुनके शाह दृष्टि२० तर नावा। हम पाहुन यहिमँदिरपरावा ॥
पाहुन ऊपर हेरै२१ नाहीँ। हना राहु अर्जुन परछाहीं ॥
दो० तपौ बीज जस धरती, सूख बिरह के घाम ।
कबसोदृष्टि२२ करबरसहि, तनतरवैर२३होयजाम॥
सेव करें दासी चहुँ पासा। अप्सरैं जानु इन्द्र कैलासा ॥
कोउ परात कोउ लोटा लाई। शाह सभा सब हाथ धोवाई ॥
कोई आगे पनवार बिछावहिं। कोई जेवन लै लै आवहिं ॥
रंगबरंग १ नाम जानवर २ नौजवान ३ तीर ४ कमान ५-६ तिरछी
निगाह ७ ज्यादा ८ बयान करना ६-१० बड़ीउमर ११ ज़मीनका मां-
लिक १२ जवाहिरात १३ छोटेनखत १४ चांद १५-१८ सूर्य १६ निगाह १७
रोशनी १६ नज़र २०-२२ देखना २१ पेड़ २३ इन्द्रलोककी परी २४ ॥