पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६२ पद्मावत ।
कीन्ह मसूरो धनै सो रसोई। जो कछु सब मांसू सो होई ॥
दो० बौरी आय एकारी, लिये सबैकइ छह ।
सब रस लीन्ह रसोई, अब मोकहँ को पूछ ॥
काटी मच्छ मेल दँधि धोई। औ बघार चहुँ बार निचोई ॥
कड़वे तेल कीन्ह बसै वारू। मेथी घृतसों दीन्ह वघारू ॥
युक्त युक्त सब मच्छ उतारे। आंव चीर तेहिमाझँ उतारे ॥
औ परेहें तेहि चटपट राखा। सोरस सुरस पाव जो चाखा ॥
भांति भांति तहँ खांड़ा तरे। अंडा तल तल बीहड़ँ धरे ॥
कहँकहँ परा कपूर बसाई। लौंग मिरच तेहि ऊपर लाई ॥
घीवटांक महि सौध सिरावा। पंखें वघार कीन्ह अरदावो ॥
दो० घृत परेहें रहा तस, हाथ पहुँच लहि बोड़।
बूढ़खाय नौयौवन, सौ मेहरी की ओड़ ॥
भांति भांति सीझी तरकारी। कयो भांति कुम्हड़े के फारी ॥
भइ भूँजी लौका परबती। रैता कीन्ह काटिकै रैती ॥
चूक लायके- रींधे भांटा। अरवी कहँ भलअरहेनें बांटा ॥
तुरइ चचेंड़े ढेढ़स तरे। जीर धुंगार मेल सब धरे ॥
परवर कुँदुरुं भूंजे ठाढ़े। बहुते घिव चुरचुरै के काढ़े ॥
कडुई काढ़ करेला काटे। अदरक मेल तरे के खोटे ॥
रींधे ठाढ़ सेवके फारे। छौंक साग पुनि सौंध उतारे ॥
दो० सीझी सबतरकारी, भा जेवन सब ऊँच।
धौंका रुचै शाह कहँ, केहिपर दृष्टि पहुँच ॥
- मसूरकी खिचड़ी १ पद्मावत २-३ दही ४ भूनना ५ बीच ६ इससब
से ७ अलग ८ केसर ६ चिड़िया १० गलाना ११ बहुत घीडाला १२ कह-
कश १३ तलना १४-१५ खटाई डाल के १६ तय्यार १७ निगाह १८ ॥