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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 264

पद्मावत । २६३
घृत कराही भीतर परा । भांति भांति सब पाकहिंबरा ॥
एकहि आंदि मिर्च सों पीठी । औ जो दूध खांड़ सो मीठी ॥
भई मुंगौछै³ मिरचहिं परीं । कीन्ह मुंगौरौं औ करपॅरीं ॥
भई मिथौरीं सिरका परा । सोंठ लायके खरसों धरा ॥
मीठ महीव औ जीरा लावा । भीज बरा नैनू जनु खावा ॥
खण्डहि कीन्ह आंब चरपरा । लौंग इलाची सों खण्डबरा ॥
कढ़ी सँवारी और फुलौरी । औ खंडवानी लाय बरोरी¹⁰ ॥
दो० पान कतर छौके रुकौछ, हींग मिर्च औ आंदे ।
एक खण्ड जो खावै, पावै सहंसैं सवाद ॥
तहरी पाक बोनें औ गरी । परी चिरौंजी औ खरहॅरी ॥
औ घृत भूंज के पाका पेठा । भाअमृत करम्ब कर मीठौ ॥
चंबकैं लोहड़ा औटा खोवा । भा हलुवा घिवकरे निचोवा ॥
शिखरन सौंध छनाई काढ़ी । जामा दही दूध सों साढ़ी ॥
और दही के मुरंडाँ बांधे । औ संधानैं बहुभांती सांधे ॥
भइ जो मिठाई कही न जाई । मुख मेलतखन जाय बिलाई ॥
मतलईं झालैं और मरकोरी । माठ पेराकैं और बुंदोरी ॥
दो० फेनी पापर भूंजे, भय अनेक परकारै ।
भइजारेँ भिजियाबर, सीझी सब ज्योनार ॥
जेत प्रकार रसोई बखानी । तब भइ सबपानी सो सानी ॥
पानी मूलैं परेखो²⁴ कोई । पानी बिना स्वाद नहिं होई ॥
अमृतपान यहि अमृतआना । पानी सो घंट रहै पराना ॥
तरहबततरह १-२२ अदरक २-११ किस्मखाने की ३-४-५-६-६-१०
पियाला ७ दही ८ हज़ार १२ नाममेवा १३-१४ शंकर का किवाम बनाके
पकाया १५ लोहे की कराही १६ लाडू १७ अचार १८ किस्म मिठाई १६-
२०-२१ खीर २३ जड़ २४ देखना २५ बदन २६ ॥