पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। ३६१
घोखांड़ो औ कुँवरें विरासू। रामदासैं आवै अतिबासू ॥
कही सो सोंधी लाची बाकी। सुगंधी बगरी बरहन पाकी ॥
कड़हन चढ़हन बंदे मनमिला। औसंसार तिलक खँडवलो॥
राजहंसैं औौर हंसी भोरी। रूपें मंजरी औगुनें गोरी ॥
दो० सोरह सहसँ बरनअस, सुगंध बासना छूट।
मधुकैरं पहुपँ सुजानके, आयपरे सब टूट ॥
निरमलै मास अनूप वघारा। तेहिके अब बरनो परकारौ ॥
कटवां घटवां मिला सो वासू। सीझा आनो भांति गिरासू ॥
बहुती सोंधी घृतहि वघारा। औ तहँ कँडुँहि पीस उतारां ॥
सेंधा लोन परा सब हांडी। काटी कन्दमूलै की आंड़ी ॥
सोवा सौंफ उतारहिं धनियाँ। तेहितेअधिकंआवबासनियाँ ॥
पानि उतारहिं ताकहं ताका। घृत परेह रहा तस पाका ॥
औौर लीन्ह मांसू के खांड़ा। लागे चढ़े सो बड़बड़ हांडा ॥
दो० छागर बहुत रामूची, धरी सराँगैंहि भूंज।
जो अस जेवन जेवै, उठै सिंह अस गूंज ॥
भूज समोसा घी महँ काढ़े। लौंग मिर्च तेहि भीतर ठाढ़े ॥
औ जो मांस अनूप सो बांय। भयेफैरं फूलआंव औ भांय ॥
नारँग दाड़िमैं तुरंज जँभीरा। औ हिन्दवाना बालम खीरा ॥
कटहर बड़हर तेउ सँवारे। नारियल दाखैं खजूर छुहारे ॥
औ जानवन्त खचीचौं होहीं। जो जेहि वरन स्वादसोओहीं ॥
सिरका भेय काढ़ जनु आने। कमलजोभयेरहहिंबिकसौने ॥
क़िस्मचावल १ से १७ तक। हज़ार १८ भँवरा १६ फूल २० साफ़ २१
घेमानिन्द २२-२६ क़िस्म २३ केसर २४ अदरक व पियाज वगैरह २५
बहुत २६ लोहे की सीख २७ शेर २८ फल-फूल आंव और बैंगन मांसके
बनायेगये ३० अनार ३१ अंगूर ३२ नाम मेवाफ़सली ३३ खिलना ३४ ॥