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न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 231, कुल 350 में से

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पृष्ठ 231

परिच्छेदः ४ ] भाषाटीकासमेता. २०७
येन पदेन विना यत्पदस्यानन्वयानुभावकत्वं तेन पदेन सह तस्या-
कांक्षेत्यर्थः। क्रियापदं विना कारकपदं नान्वयबोधं जनयतीति
तेन तस्याकांक्षा।
भाषा-अर्थात् जिस 'क्रियादि' पदसे विना जिस 'कर्मादिकारक' पदका
अन्वयबोध नहीं होसकता उस क्रियापदके साथ उस 'कारक' पदकी आकांक्षा है.
क्रियापदसे विना केवल 'कारक' पद अन्वय बोधका जनक नहीं होता. इसलिये
'क्रिया'पदके साथ 'कारक' पदकी आकांक्षा है.
वस्तुतस्तु क्रियाकारकपदानां सन्निधानमासत्त्या चरितार्थम्।
परंतु घटकर्मताबोधं प्रति घटपदोत्तरद्वितीयाकांक्षाज्ञानं कार-
णम्, तेन घटः कर्मत्वमानयनं कृतिरित्यादौ न शाब्दबोधः।
भाषा-और वास्तवसे तो क्रियाकारकादिपदोंकी अव्यवधानरूपसे सन्निधि .
अंशका लाभ पूर्वोक्त आसत्तिसेही होचुका है. इसलिये क्रियाकारक पदोंकी
आकांक्षाका पृथक् वर्णन करना उचित नहीं है (परन्तु) तथापि प्रत्ययमें प्रकृति
उत्तरत्वरूप आकांक्षाज्ञान आसत्तिसे पृथक्रूपेण शाब्दबोधमें कारण है; इसलिये
आकांक्षा ज्ञानभी पृथक् कारण है. जैसे घटनिष्ठ कर्मताबोधके प्रति 'घट' पदके
अव्यवहित उत्तर (अमादि) द्वितीयाविभक्तिरूप आकांक्षाका ज्ञान शाब्दबोधमें कारण
है एवं 'घटः कर्मत्वं आनयनं कृतिः' इत्यादि विपरीत वाक्यस्थलोंमें “घटमा-
नय” इत्यादि साकांक्षवाक्यके सदृश शाब्दबोध नहीं होसकता.
'अयमेति पुत्रो राज्ञः पुरुषोऽपसार्यताम्'इत्यादौ तु पुत्रेण सह
राजपदस्य तात्पर्यग्रहात्तेनैवं सहान्वयबोधः। पुरुषेण सह ता-
त्पर्यग्रहे तु तेन सहान्वयबोधः स्यादेव।
भाषा-एवं“अयमेति पुत्रो राज्ञः पुरुषोऽपसार्यताम्” इत्यादि उभयाकांक्षावाक्य
स्थलमें वक्ताके तात्पर्यज्ञानानुरोधसे शाब्दबोध होता है. भाव यह कि-यहां
'राज'पद उत्तरसम्बन्धविशेषकी बोधिका षष्ठीविभक्ति राजपदार्थका पुत्र तथा पुरुष
दोनोंमें अन्वयबोधन करतीहै. यदि पुत्रके साथ अन्वयमें वक्ताका तात्पर्य होय तो
वाक्यार्थ यह होगा कि-'यह राजाका पुत्र आताहै, आगेसे जनसमुदायको कनारे
करो' और यदि पुरुषके साथ अन्वयमें वक्ताका तात्पर्य होय तो वाक्यार्थ यह होगा
कि-राजाका पुरुष आताहै आगेसे अपने पुत्रको कनारे करो. एवं 'पुत्र'पदके साथ