न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८० न्यायसिद्धान्तमुक्तावली- [ शब्द-
वृत्त्यापदजन्यत्वं बोध्यम् । अन्यथा घटादिपदात्समवायसम्बन्धे-
नाकाशस्मरणे जाते आकाशास्यापि शाब्दबोधापत्तेः ।
भाषा-एवं पदजन्य पदार्थस्मरणमध्यमें व्यापार है. ( अन्यथा ) यदि पदज-
न्यपदार्थस्मरणको व्यापार नहीं मानें, किन्तु पदजन्यपदार्थज्ञानहीको मानें, वह ज्ञान
चाहो जैसाभी हो तौ पदज्ञानवाले पुरुषको प्रत्यक्षादि प्रमाणसे पदार्थ उपस्थिति
होनेसेभी शाब्दबोध होना चाहिये;परन्तु ऐसा होता कभी नहीं. यहां पदजन्यपदार्थ-
स्मरणभी पदकी वृत्तिद्वारा समझना चाहिये.(अन्यथा ) येनकेन सम्बन्धेन कहेंगे तो
घटादि पदोंसे समवायसम्बन्धसे आकाशका स्मरण हुए घटादि पदोंसे आकाशका
शाब्दबोध होना चाहिये.
वृत्तिश्च शक्तिलक्षणान्यतरः सम्बन्धः । अत्रैव शक्तिज्ञानस्योप-
योगः। पूर्वं शक्तिग्रहाभावे पदज्ञानेऽपि तत्सम्बन्धेन स्मरणानुप-
पत्तेः । पदज्ञानस्य च एकसम्बन्धिज्ञानविधयाऽर्थस्मारकत्वम् ।
भाषा-' वृत्ति ' नाम पदपदार्थके परस्परसम्बन्धका है वह सम्बन्ध वाच्यवाचक
बोध्यबोधक ज्ञाप्यज्ञापक भावादि अनेक प्रकारका है वह वृत्ति शक्ति तथा लक्षणा-
भेदसे दोप्रकारकी है. ( अत्रैव ) यहां पदजन्यपदार्थउपस्थितिहीमें शक्तिज्ञानका
उपयोग है; क्योंकि यदि पहले पदशक्तिका ग्रहण न हो तो पदज्ञान होनेसेभी उसके
सम्बन्धसे पदार्थका स्मरण नहीं होता. एवं पदज्ञानको " एक सम्बन्धिज्ञानविधया "
अर्थात् " एकसम्बन्धिज्ञानमपरसम्बन्धिस्मारकं " इस नियमसे जैसे हाथीको देखकर
हाथिवान् महावतका तथा महावतको देखकर हाथीका स्मरण होता है वैसेही पदज्ञा-
नकोभी सम्बन्धिज्ञानविधया अर्थस्मारकत्ता है.
शक्तिश्च पदेन सह पदार्थस्य सम्बन्धः, स चास्माच्छब्दादयमर्थो
बोद्धव्य इतीश्वरेच्छारूपः। आधुनिके नाम्नि शक्तिरस्त्येव।एका-
दशेऽहनि पिता नाम कुर्यादितीश्वरेच्छायाः सत्त्वात् । आधु-
निके तु सङ्केते न शक्तिरिति सम्प्रदायः । नव्यास्त्वीश्वरेच्छा न
शक्तिः, किन्त्विच्छैव । तेनाधुनिकसङ्केतेऽपि शक्तिरस्त्येवेति
वदन्ति । शक्तिग्रहश्च व्याकरणादितः ।
भाषा-पदके साथ पदार्थके सम्बन्धविशेषका नाम 'शक्ति' है. वह सम्बन्धविशेष
“अस्मात्पदादयमर्थो बोद्धव्यः” अर्थात् “ इस पदसे यह अर्थ जानना चाहिये ”