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न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 146, कुल 350 में से

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पृष्ठ 146

अथानुमानपरिच्छेदः २.
भाषाकारकृतमंगलाचरणम् ।
यन्नामसिंहैकसुकीर्तनेन भूयोऽन्तरायाश्च शृगालयन्ति ॥
पद्मेक्षणः पावनपादपद्मः पायात्सदा श्रीगुरुनानको नः ॥ १ ॥
अनुमिति व्युत्पादयति, व्यापारस्त्विति-
भाषा-अनुमान प्रमाण बहुवादिसम्मत है इसलिये हेतु हेतुमद्भावसङ्गतिसे प्र-
त्यक्षनिरूपणानन्तर 'व्यापारस्तु परामर्शः' इत्यादि ग्रन्थसे मूलकार अनुमान प्रमाणका
निरूपण करतेहैं-
व्यापारस्तु परामर्शः करणं व्याप्तिधीर्भवेत् ॥६६॥
अनुमायां -
भाषा-अनुमित्यात्मक ज्ञानमें व्याप्तिज्ञानको कारणता है और परामर्शात्मक ज्ञान
मध्यमें व्यापार है.
अनुमायामनुमितौ व्याप्तिज्ञानं करणं, परामर्शो व्यापारः।तथा-
हि । येन पुरुषेण महानसादौ धूमे वह्नेर्व्याप्तिर्गृहीता पश्चात्स
एव पुरुषः क्वचित् पर्वतादविच्छिन्नमूलां धूमलेखां पश्यति,
तदनन्तरं धूमो वह्निव्याप्य इत्येवं रूपं व्याप्तिस्मरणं तस्य भव-
ति, पश्चाच्च वह्निव्याप्यधूमवानयमिति ज्ञानं भवति स एव
परामर्श इत्युच्यते । तदनन्तरं पर्वतो वह्निमानिति ज्ञानं जायते,
तदेवानुमितिः।
भाषा-अनुमितिज्ञानके प्रति व्याप्ति ज्ञानको करणता और परामर्श व्यापार
इस रीतिसे है कि-जिस पुरुषने महानसादिस्थलोंमें “यत्र२धूमस्तत्र२ वह्निः” इत्या-
कारक 'सहचर्यनियमरूपाव्याप्ति' वह्नि निरूपित धूमहेतु विषयक अनेक वार ग्रहण
करी है. फिर पीछे दैवात् वही पुरुष किसी पर्वतादिके समीप जायकर ऊपरनीचेतक
एकरस सरल लम्बायमान धूम शिखाको देखकर पीछे महानसादिमें गृहीत व्याप्ति-
को स्मरण करता है कि "धूम वह्निनिरूपित व्याप्तिका आश्रय है” इत्याकारक व्याप्ति
स्मरणके पीछे उसी पुरुषको "वह्निनिरूपित व्याप्तिका आश्रय जो धूम उसवाला यह