न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेदः १ ] भाषाटीकासमेता. १२१
चिन्ता ध्यानं, मनसस्तदेकाग्रीकरणं, तत्सहकारात् स्थूलसूक्ष्मा-
व्यवहितविप्रकृष्टानर्थान् प्रत्यक्षीकरोतीत्यर्थः ।
इति श्रीविश्वनाथपञ्चाननभट्टाचार्यविरचितायां सिद्धान्त-
मुक्तावल्यां प्रत्यक्षखण्डम् ॥ १ ॥
भाषा-चित्तवृत्तिनिरोधरूप योगाभ्याससे मनको वशीभूत करनेवाला तथा स-
म्प्रज्ञात असम्प्रज्ञात समाधिद्वारा अणिमादि अनेक प्रकारकी सिद्धियोंके सम्पादन
करनेवाला पुरुष युक्तयोगी कहाजाता है. विशेष योगयुक्त होनेसे इसीको शास्त्रमें वि-
युक्तभी कहतेहैं.इस युक्त योगीको सर्व विषय विषयक साक्षात्कार चिंताकी सहकारता-
से विनाभी होता है और विषयासंलग्नमानस जो द्वितीय युंजानयोगी है उसको तद्
विषयाकार चित्तके एकाग्र करनेसे आकाश परमाण्वादि देशान्तरीय कालान्तरीय
यावत् पदार्थोंका साक्षात्कार होता है-इति शम् ।
इति श्रीगोविंदसिंहसाधुकृते आर्य्यभाषाविभूषितन्यायसिद्धान्त
मुक्तावलीप्रकाशे प्रत्यक्षः परिच्छेदः ॥ १ ॥