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सर्वकोश
न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)

Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda

विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 108

८४ न्यायसिद्धान्तमुक्तावली- [ प्रत्यक्ष-
एतेन प्रकृतिः कर्त्री, पुरुषस्तु पुष्करपलाशवन्निर्लेपः किंतु चेत-
नः, कार्यकारणयोरभेदात्कार्यनाशे सति कार्यरूपतया नाशः
स्यादित्यकारणत्वं तस्य।
भाषा—'एतेन' इस पदका 'इति मतमपास्तम्' इस अग्रिम पाठके साथ सम्बन्ध
है; अर्थात् 'एतेन' इस पूर्वोक्त युक्तिद्वारा आत्माको ज्ञानाधिकरण सिद्ध करनेसे
तथा आगे कथनीय युक्तिसे (इति मतं) सांख्यशास्त्रमें कहा कपिलमुनिका मतभी
(अपास्तम्) खण्डन किया है. सांख्यीके मतमें मूलप्रकृतिही आद्यकर्तारूप है और
(पुरुष) जीवात्मा जलगत कमलपत्रकी तरह अलिप्त है; परन्तु चेतन है. इस
मतमें कार्यका तथा उपादानकारणका परस्पर अभेद है कार्यके नाश होनेसे कार्य-
रूपहीसे कारणकाभी नाश मानना पड़ता है इसलिये पुरुष किसी कार्यका उपादा-
नकारण नहीं, याते विनाशीभी नहीं.
बुद्धिगतचैतन्याभिमानादन्यथाऽनुपपत्त्या तत्कल्पनम्