नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)
Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary
महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा
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नवमोऽध्यायः ८३
हस्तानां करणविधिर्मया समासेन निगदितो विप्राः
अत ऊर्ध्वं व्याख्यास्ये हृदयोदरपार्श्वकर्माणि ॥ २१४ ॥
हे मुनिजन, इस प्रकार संक्षेप में मैंने करणों की हस्ताभिनय द्वारा
होने वाली विधि बतलाई । अब मैं हृदय, ( वक्षस्थल ) उदर तथा बाजुओं
के अभिनय कार्यों को बतलाता हूँ ॥ २१४ ॥
इति भारतीये नाट्यशास्त्रे हस्ताभिनयो नाम नवमोऽध्यायः ॥
॥ भरतनाट्यशास्त्र का 'हस्ताभिनय' नामक नवम अध्याय समाप्त ॥
१. क० ख—पुस्तकयोर्नात्राध्यायसमाप्तिः ।