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सर्वकोश
मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)

Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished45 पृष्ठ

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पृष्ठ 39

३० मलूकदासजी की बानी
कह मलूक हम जबहि तें, लीन्ही हरि की ओट ।
सोवत हैं सुख नींद भरि, डारि भरम की पोट ॥११॥
उहाँ न कबहुँ जाइये, जहाँ न हरि का नाम ।
डीगंबर१ के गाँव में, धोबी का क्या काम ॥१२॥
राम राम के नाम को, जहाँ नहीं लवलेस ।
पानी तहाँ न पीजिये, परिहरिये सो देस ॥१३॥
गाँठो सत कुपीन२ में, सदा फिरै निःसंक ।
नाम अमल माता रहे, गिने इन्द्र को रंक ॥१४॥
राम नाम जिन जानिया, तेई बड़े सपूत ।
एक राम के भजन बिन, काँगा३ फिरै कपूत ॥१५॥
राम नाम एकै रती, पाप के कोटि पहाड़ ।
ऐसी महिमा नाम की, जारि करै सब छार ॥१६॥
राम नाम औषध करो, हिरदै राखो याद ।
संकट में लौ लाइये, दुर करै सब व्याध ॥१७॥
धर्महिं का सौदा भला, दाया जग व्योहार ।
राम नाम की हाट ले, बैठा खोल किवार ॥१८॥
रहूँ भरोसे राम के, बनिजे४ कबहुँ न जावँ ।
दास मलूका यों कहै, हरि बिड़वे५ मैं खावँ ॥१६॥
साहेब मेरा सिर खड़ा, पलक पलक सुधि ले ।
जबहीं गुरु किरपा करें, तबहिं राम कछु दे ॥२०॥
मोदी सब संसार है, साहेब राजा राम ।
जा पर चिट्ठो ऊतरे, सोई खरचे दाम ॥२१॥
औरहिं चिन्ता करन दे, तू मत मारै आह ।
जा के मोदी राम से, ताहि कहा परवाह ॥२२॥
(१) नागा। (२) लँगोटी। (३) कंगाल । (४) ब्यौपार को । (५) कमाय ।