मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)
Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहरि हजरत मोहिं माधव मकुन्द की सौं,
छाँड़ि केसवराय मेरो दूसरो न कोई है ॥ ४ ॥
( ६ )
जिसके दीदार को मुसाफिरी को दिल हुआ ।
बहुत खूब ऐसा जो नगींच१ कर पाइये ॥ १ ॥
खाब सी दुनियाँ को दिल कौन करै सात पाँच२ ।
बन्दे हैं जिसके क्यों न तिसके कहलाइये ॥ २ ॥
अगम अगोचर सबहिन में रहता नियार ।
जा को जस नीत बत्त संतन बार बार गाइये ॥ ३ ॥
कहता मलूक महबूब पिया खूब यार ।
सिर लगाय जमीं में सिरदा३ कराइये ॥ ४ ॥
( ७ )
बार बार करता हूँ नसीहत मैं तेरी तईं ।
क्यों बे हरामखोर साँईं तू बिसारा है ॥ १ ॥
जिसका नित नोन खात मुतलक भी ना डरात ।
अच्छा वजूद पाय औरत से हारा है ॥ २ ॥
कौल से बेकौल हुआ किसी की न लेत दुआ ।
दोजख४ के लिये दिल कौन कौन मारा है ॥ ३ ॥
कहता मलूक अब तोबा कर साहेब से ।
छाँड़ि दे कुराह जिन जारे पर जारा है ॥ ४ ॥
( ८ )
बंदा तैं गंदा गुनाह करै बार बार ।
साँईं तू सिरजनहार मन में न आनिये ॥ १ ॥
हाथ कछु मेरे नाहीं हाथ सब तेरे साँईं ।
खलक के हिसाब बीच मुझको मत सानिये ॥ २ ॥
(१) पास । (२) हैरान, डाँवाडोल । (३) सिजदा । (४) पेट ।