मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)
Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकवित्त २५
( ३ )
माला कहाँ औ कहाँ तसबीह,
अब चेत इनहिं कर टेक न टेकै ॥ १ ॥
काफिर कौन मलेच्छ कहावत,
संध्या निवाज समय करि देखै ॥ २ ॥
है जमराज कहाँ जबरील है,
काजी है आप हिसाब के लेखै ॥ ३ ॥
पाप औ पुन्य जमा कर बूझत,
देत हिसाब कहाँ धरि फेकै ॥ ४ ॥
दास मलूक कहा भरमौ तुम,
राम रहीम कहावत एकै ॥ ५ ॥
( ४ )
माला कहाँ और कहाँ तसबीह,
अब चेत इनहिं कर टेक न टेकी ॥ १ ॥
बाँधे डोल अकास पताल लौं,
भूलन जात कहे हरि सेती ॥ २ ॥
लोक की लाज में होत अकाज है,
कौन सहै मेरे साँसत एती ॥ ३ ॥
दास मलूक दिन दुइ की बात है,
पायो राम छुट्यो जम सेती ॥ ४ ॥
( ५ )
बीर रघुबीर पैगम्बर खोदा मेरे,
कादिर करीम काजी माया मत खोई है ॥ १ ॥
राम मेरे प्रान रहमान मेरे दीन इमान,
भूल गयो भैया सब लोक लाज धोई है ॥ २ ॥
कहत मलूक मैं तो दुबिधा न जानौ दूजी,
जोई मेरे मन में नैनन में सोई है ॥ ३ ॥
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