मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)
Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४ मलूकदासजी की बानी
सोने की सलैया नाहिं रूपे का रुपैया नाहिं,
कौड़ी पैसा गाँठ नहीं जासे कछु लीजिये ॥ २ ॥
खेती नाहिं बारी नाहिं बनिज ब्यौपार नाहिं,
ऐसा कोई साहु नाहिं जासों कछु माँगिये ॥ ३ ॥
कहत मलूकदास छोड़दे पराई आस,
राम धनी पाय के अब का की सरन जाइये ॥ ४ ॥
कबित्त
( १ )
परम दयाल राया राय परसोत्तम जी,
ऐसो प्रभु छाँड़ि और कौन के कहाइये ॥ १ ॥
सीतल सुभाव जा के तामस को लेस नहीं,
मधुर बचन कहि राखै समझाइये ॥ २ ॥
भक्त - बछल गुन - सागर कला - निधान,
जाको जस पाँत नित बेदन में गाइये ॥ ३ ॥
कहत मलूक बल जाउँ ऐसे दरस की,
अधम - उधार जा के देखे सुख पाइये ॥ ४ ॥
( २ )
जौन कोई भूखा गोपाल की मोहब्बत का।
तौन दुर्वेसन का पैंड़ा निराला है ॥ १ ॥
रहते महजूज१ वे तो साहेब की सूरत पर।
दुनियाँ को तर्क२ मार दीन को सम्हाला है ॥ २ ॥
किसी से न करें सवाल उनका कुछ और ख्याल।
फिरते अलमस्त वजूद३ भी बिसारा है ॥ ३ ॥
कहता मलूक उन्हें सूझता है बेचुगून४।
किसी की गरज नहीं अन्दर अँधियारा है ॥ ४ ॥
(१) पगे हुए। (२) त्याग कर। (३) देंह। (४) बेचून। (५) बेमिस्ल।